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इटली में फासीवाद का उदय का इतिहास।

इटली में फासीवाद का उदय
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में कई राजनीतिक आंदोलन हुए उनमें से एक फासिस्ट आंदोलन है इस आंदोलन का एकमात्र लक्ष्य तथा जनतंत्र को नष्ट कर तानाशाही स्थापित करना इटली और जर्मनी में फासीवाद के बड़े खतरनाक परिणाम हुए।

फासीवाद का तात्पर्य

फ़ासिज़्म शब्द इतालवी मूल का है इसका प्रयोग सर्वप्रथम बेनिटो मुसोलिनी के नेतृत्व में चलाए गए आंदोलन के लिए किया गया था फासीवाद कट्टर या उग्र राष्ट्रीयता का ही एक रूप एवं तानाशाही का परिचायक है।

फासीवाद की विशेषताएं

१.राज्य में व्यक्ति को महत्व नहीं

२. जनतंत्र विरोधी।
३. समाजवाद विरोधी
४. शांति विरोधी
५. कमजोर राज्यों के अस्तित्व में विश्वास नहीं
६. आतंक का शासन
७. उग्र विदेश नीति का समर्थक

इटली में फासीवाद के उदय का कारण

१. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद असंतुष्टि
इटली के युद्ध में सम्मिलित होने का लक्ष्य उपनिवेश प्राप्त करना था इसके शांति सम्मेलन में अपना लक्ष्य पूर्ण ना होते देख इटली वासियों में असंतुष्ट ही छा गई थी।

२. इटली की आंतरिक स्थिति
प्रथम विश्वयुद्ध का अंत हो जाने के बाद लाखों व्यक्ति बीमार हो गए 1918 के बाद इटली की आर्थिक स्थिति खराब हो गई फैक्ट्रियों के मज़दूर हड़ताल करने लगे थे।

३. सरकार की उदासीनता
सरकार ने इटली के खेतिहर और औद्योगिक मजदूरों की दुर्दशा पर कोई दिलचस्पी नहीं ली अतः फासिस्टवाद का उदय हुआ।

४. समाजवादियों की गतिविधियां
क्यों देश किसी भी हालात में सामने वादियों के जाल में फंसना नहीं चाहते थे वह एक शक्तिशाली राष्ट्रों सत्ता की स्थापना करना चाहते थे अतः फासीवाद के उदय को प्रोत्साहन मिला।

५. मुसोलिनी का व्यक्तित्व
मुसोलिनी मैं राजनीतिक चिंतन का गुण था वह एक जोशीला वक्ता तथा कुशल संगठन करता था वह 1922 में प्रधानमंत्री बन गया।

फासिस्ट पार्टी का जन्म तथा मुसोलिनी का अभ्युदय

मुसोलिनी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था 18 वर्ष की अवस्था में वह शिक्षक बना उसे अधिक शिक्षा की जरूरत महसूस हुई वह स्वीटजरलैंड चला गया उसने जिनेवा विश्वविद्यालय में शिक्षा पाई उसने मजदूर दल का संगठन किया और कारखानों में पड़ताल कराई फतेह सरकार ने उसे स्विट्जरलैंड से निकाल दिया।

इसके बाद वहां ऑस्ट्रेलिया गया वहां से भी उसे निकाल दिया गया 1915 में वह सेना में भर्ती हो गया 1017 में युद्ध भूमि से वह जख्मी होकर लौटा और अपने को सैनिक सेवा से मुक्त कर लिया भूतपूर्व सैनिकों की मदद से एक संगठन बनाया जिसे फासिस्ट कहा जाता है।

फांसी स्टोर का सिद्धांत फासीवाद का हल आया था सिस्टर पार्टी के युवक सदस्यों को काली कमीज भी कहा जाता था क्योंकि यह लोग हमेशा काली कमीज पहनते थे।

पाकिस्तानी प्राचीन रोमन साम्राज्य के प्रतीकों को स्वीकार कर लिया था सिस्टर पार्टी एक अनुशासित पार्टी थी जो धीरे-धीरे लोकप्रिय हो गई और लोग इनके कार्यों से प्रभावित होने लगे इसका उद्देश्य था साम्यवादी आंदोलन को कुचलना।

इटली की सरकार उस समय बहुत ही कमजोर थी और देश में चारों और अराजकता फैल गई थी सन 1921 में चुनाव हुए किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला मुसोलिनी के अनुयायियों ने आतंक खाया फिर भी फांसी स्टोर को मात्र 35 स्थान मिले।

कम्युनिस्ट और समाजवादियों को 138 स्थान मिले फिर भी मुसोलिनी हतोत्साहित नहीं हुआ उन्होंने नेपल्स नगर में सभा का आयोजन किया जिसमें हजारों स्वयंसेवक एवं दल के अन्य सदस्य थे 28 अक्टूबर सन 1922 को रूम गिरने के लिए एक अभियान का आयोजन किया।

इटली का राजा विक्टर मैन्युअल आतंकित हो उठा सन 1922 में 29 अक्टूबर को राजा ने मुसोलिनी को सरकार में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया मुसोलिनी ने आमंत्रण सहर्ष स्वीकार कर लिया और कहा कल इटली में मंत्रिमंडल नहीं रहेगा बल्कि सरकार रहेगी बिना एक भी गोली चलाए मुसोलिनी के नेतृत्व में फांसिस्ट इटली में सत्तारूढ़ हो गई।

फासिस्ट पार्टी के विजय के कारण

वहां का शासक एवं जनता दोनों लोकतंत्र और समाजवाद को देश के लिए खतरा समझते थे उन्हें यह विश्वास था कि फासीवाद ही समाजवादी आंदोलन का दमन कर सकते हैं इसलिए उन्हें इटली का शासन सौंप दिया गया।

मुसोलिनी के कार्य फासीवादी की विजय के परिणाम

१. अधिनायकवाद की स्थापना

मुसोलिनी ने इटली में आतंक का राज्य कायम किया अपने दल को छोड़कर सभी दलों पर प्रतिबंध लगा दिया उसने समाजवादी आंदोलन को कुचल दिया जल थल और वायुसेना पर भी अपना अधिकार कर लिया था सिस्टर अखबारों को छोड़कर अन्य सभी अखबारों को बंद कर दिया गया।

२. आर्थिक सुधार

मुसोलिनी ने युद्ध का ऋण चुका दिया औद्योगीकरण और कृषि में उन्नति की रेडियो मोटा और हवाई जहाजों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया।

३. शिक्षा संबंधी सुधार

विद्यालयों में फांसी से संबंधित शिक्षा अनिवार्य कर दी गई सैनिक प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया यह मंत्र दिया जाता था कि विश्वास करो आज्ञा मानो और युद्ध करो।

४. यहूदियों का विरोध

इटली में यहूदियों के लिए कोई स्थान नहीं था परिणाम स्वरूप आने की हो दीया ने इटली को छोड़ दिया

५. विजय अभियान

सन 1924 में मुसोलिनी ने युगो स्लोवाकिया के साथ संधि की उसने अल्बानिया पर अधिकार कर लिया सन 1935 में इटोपिया और अल्बानिया पर आक्रमण किया एवं उस पर अधिकार कर दिया।

६. स्पेन का युद्ध

सन 1936 में स्पेन में गृहयुद्ध चूड़ा विद्रोहियों का नेता जनरल फ्रैंको था जनरल सैनिकों ने मुसोलिनी की मदद से स्पेन की सत्ता हथिया ली।

७. विभिन्न देशों से संधियां

इटली और जर्मनी के बीच 1936 में एक संधि हुई जो रोम बर्लिन दूरी के नाम से जानी जाती है जर्मनी ने जापान के साथ एंटी को मिंटन पैक किया मुसोलिनी उसमें शामिल हो गया इस प्रकार रोम बर्लिन टोक्यो धुरी राष्ट्र का पैक बन गया जो द्वितीय विश्व युद्ध में मिलकर लड़े।

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जर्मनी में नाजीवाद का उदय नाजीवाद का तात्पर्य

जर्मनी में नाजीवाद का उदय नाजीवाद का तात्पर्य
नाजीवाद फ़ासिज़्म का जर्मन रूप था। नारी शब्द हिटलर द्वारा सन् 1921 में स्थापित गर्ल नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी के नाम से निकला है इसी दल को संक्षेप में नाजी पार्टी कहते हैं।

नाजीवाद की विशेषताएं

१. महान नेता का गुणगान
नाजीवाद में अपने महान नेता की महिमा का गुणगान एवं उसके आदेशों का पालन करना अनिवार्य था।

२. गणतंत्र का विरोधी
नाजीवाद अंतर्राष्ट्रीय शांति और जनतंत्र का विरोधी था वह संसदीय संस्थाओं का अंत करने का प्रबल समर्थक था।

३. व्यक्ति का स्थान गौण
नाजीवाद में व्यक्ति को गांव में समझा जाता था यह कहा जाता था कि लोग राज्य के लिए है ना कि राज्य लोगों के लिए।

४. उग्र राष्ट्रवाद का समर्थक
नाजीवाद के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि था वह राष्ट्रवाद का प्रबल समर्थक था।

५. लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बल में विश्वास
नाजीवाद लक्ष्य की प्राप्ति के हर विरोध को कुचल देना चाहता था नाजीवाद के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बल प्रयोग एवं बर्बरता पूर्ण व्यवहार में विश्वास करता था।

६. यहूदियों के प्रति घृणा
हिटलर यहूदियों के प्रति घृणा करता था उन्हें हर प्रकार से पीड़ित और अपमानित करता था ना जी बाद में यहूदियों को जर्मनी की आर्थिक कठिनाइयों के लिए जिम्मेवार ठहराया गया था।

हिटलर का उत्कर्ष

हिटलर का जन्म ऑस्ट्रेलिया के एक गांव में सन 1889 में हुआ था गरीबी के कारण वह विधिवत शिक्षा ग्रहण कर नहीं पाया वह म्युनिख चला गया और एक चित्रकार बन गया उसी समय प्रथम विश्वयुद्ध हुआ हिटलर सेना में भर्ती हो गया और उसने असाधारण योग्यता दिखाई।

उसे आयन क्रॉस मिला वर्षा की अपमानजनक संधि के बाद जर्मनी का उद्धार करने के लिए हीटलर ने राजनीतिक में प्रवेश किया।

हिटलर ने जर्मन वर्कर्स पार्टी का गठन किया आगे चलकर इस पार्टी का नाम बदलकर नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी रखा गया यह नाजी पार्टी के नाम से प्रसिद्ध हुई।

सन 1923 में हिटलर ने अपने साथियों के साथ मिलकर जर्मनी की गणतंत्र सरकार को पलटने का प्रयास किया वह पकड़ा गया और उसे 5 वर्ष के कारावास का दंड मिला कारावास में ही उसने अपनी आत्मकथा भी केम्फ का प्रथम भाग लिखा।

इसमें उसने एक जनतंत्र की घोर निंदा की हिटलर ने नाजी पार्टी संगठन में मुसोलिनी का अनुकरण किया नाजी पार्टी साम्यवादी व्यवस्था की विरोधी कि जर्मनी के देशभक्त और भूतपूर्व सैनिक अफसर नारी पार्टी के कट्टर समर्थक बन गए फिर अपने को देश का फ्यूरर कहता था।

उसके अनुयाई वहां पर स्वास्तिक का चिन्ह लगाते थे सन 1932 में राष्ट्रपति का चुनाव होने वाला था इधर भी इस पद के लिए उम्मीदवार बना पर वह हार गया राष्ट्रपति हिडेनबर्ग नेशन 1933 को उसे चांसलर का पद दिया प्रधानमंत्री बनते ही हिटलर ने गणतंत्र की कब्र खोदी शुरू कर दी।

प्रधानमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही पिलर ने नए चुनावों के आदेश जारी किए आतंक का राज्य स्थापित किया ना जी विरोधी अनेक नेताओं की हत्या की 27 फरवरी सन 1933 को संसद भवन में आग लगाई।

इसका दोस् कम्युनिस्ट पार्टी पर लगाया सन 1934 में हिटलर जर्मनी का तानाशाह बन बैठा।

सन 1934 में राष्ट्रपति हीरोइन वर्ग की मृत्यु हो गई शुक्ला ने एक कानून बना दिया जिसके तहत राष्ट्रपति का पद प्रधान मंत्री के पद से मिला दिया गया वह सर्वशक्तिमान बन गया उसने तानाशाही अधिकार ग्रहण कर लिया हीटर का नारा था एक राष्ट्र एक नेता उसे गैर फ्यूरर रहा जाता था।

नाजीवाद के उदय का कारण

१. वर्साय की अपमानजनक संधि

२. आर्थिक संकट 1929

३. यहूदियों विरोध की भावना

४. साम्यवाद का उदय

५. सैनिक प्रवृत्ति

६. हिटलर का व्यक्तित्व

वस्तुतः नाजीवाद का उदय जर्मन जनता के साथ-साथ संसार के लिए भी विनाशकारी सिद्ध हुआ अंततोगत्वा यहां द्वितीय विश्वयुद्ध का कारण बना।

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द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारंभ होने के तात्कालिक कारण

द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारंभ होने के तात्कालिक कारण

हिटलर द्वारा पोलैंड पर आक्रमण द्वितीय युद्ध का तात्कालिक कारण था हिटलर बाल्टिक सागर तक पहुंचने के लिए मार्ग चाहता था उसने पोलैंड से मांग की कि डेजिंग बंदरगाह तथा वहां तक पहुंचने के लिए जर्मनी को मार्ग दे परंतु पोलैंड की सरकार ने फ्रांस से सहायता का आश्वासन पाकर हिटलर की मांग को ठुकरा दिया हिटलर ने 1 सितंबर 1939 को जर्मन सेनाएं बोलन में घुसा आदि 3 सितंबर को ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की इस तरह पोलैंड पर हमले के साथ द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रारंभ हुआ।

पोलैंड को कोई सहायता ना मिली है 3 सप्ताह से भी कम समय में जर्मन सेनाओं ने पूरी तरह पोलैंड को जीत लिया लैंड की राजधानी व्हाट्सएप पर अधिकार कर लिया अनेक महीनों तक वास्तविक लड़ाई नहीं हुई इसलिए सितंबर 1939 से अप्रैल 1940 तक जर्मनी द्वारा नार्वे और डेनमार्क पर हमले के समय तक के युद्ध को नकली युद्ध कहा जाता है।

1940 में तीन बाल्टिक राज्य वित्त वानिया ले लिया और एस्तोनिया जो प्रथम विश्वयुद्ध के बाद स्वतंत्र हो गए थे सोवियत संघ में शामिल हो गए एक गणराज्य के रूप में मॉल दातिया भी सोवियत संघ में शामिल हो गया नवंबर 1939 में सोवियत संघ का फिनलैंड से युद्ध हुआ।

5 जून 1940 को जर्मनी ने फ्रांस पर तीन ओर से आक्रमण कर दिया 10 जून को हिटलर ने पेरिस पर अधिकार कर लिया 22 जून को जर्मनी ने सोवियत संघ पर आक्रमण कर दिया आरंभिक दौर में जर्मनी की ओर सफलताएं मिली उसने लेनिनग्राड पर गिरा डाल दिया तथा जर्मन सेना ने मास्को की तरफ बढ़ने लगी।

सोवियत संघ ने जर्मन हमले का बहादुरी से सामना किया इसके पश्चात हमले का सामना करने के लिए ब्रिटेन सोवियत संघ और अमेरिका को एक होना पड़ा।

ब्रिटेन के चर्चित और अमेरिका के रोज वैलनेस रूस के सहायता देने का वायदा किया इसके बाद सोवियत संघ और ब्रिटेन के बीच तथा सोवियत संघ और अमेरिका के बीच समझौते हुए इसी एकता के परिणाम स्वरुप जर्मनी इटली और जापान को हराया गया।

द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका का प्रवेश

अभी तक संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस युद्ध में हस्तक्षेप नहीं किया था दिसंबर 1941 को जापान में युद्ध की घोषणा किए बिना आक्रमण किया जिससे पर्ल हार्वर में अमेरिका को 20 जंगी जहाजों और 250 हवाई जहाजों से हाथ धोना पड़ा।

लगभग 3000 लोग मारे गए 18 दिसंबर 1940 को अमेरिका ने जापान के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी एशियाई क्षेत्रों में लड़ाई में जापान को महत्वपूर्ण सफलता मिली जापान ने मलायमा इंडोनेशिया फिलीपाइन सिंगापुर थाईलैंड हांगकांग और दूसरे अन्य क्षेत्रों को जीत लिया।

फासीवाद तत्वों के विरुद्ध लड़ने वाले देशों में जनवरी 1942 को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जिसमें हस्ताक्षर करने वाले देशों में विजय होने तक एक रहने की शपथ ली।

जब मास्को की ओर से जर्मनी के अभियान को कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा तब उसने रूस के दक्षिणी भाग पर आक्रमण किया अगस्त 1942 में जर्मन सेना a-star लिंगराज के बाहर तक पहुंच गई 5 महीने तक भयंकर युद्ध हुआ।
इस युद्ध में सैनिकों तथा रिश्ता लिंगराज की जनता ने अभूतपूर्व वीरता का परिचय दिया है जर्मनी को मुंह की खानी पड़ी और फरवरी 1943 में लगभग 90000 अफसरों और सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया इस लड़ाई ने युद्ध का रुख मोड़ दिया।

फासीवाद देशों को दूसरे क्षेत्रों में भी नुकसान होने लगा 1993 के आरंभ तक उत्तरी अफ्रीका में जर्मन इतालवी सेनाओं का सफाया हो गया जुलाई 1993 में ब्रिटिश हुआ अमेरिकी सेनाओं ने सीरीज पर कब्जा कर लिया रिट्री की जनता मुसोलिनी के खिलाफ हो गई मुसोलिनी को गिरफ्तार कर लिया गया और वहां एक नई सरकार की स्थापना हुई जर्मन सेनाओं ने उत्तरी इटली पर हमला कर दिया मुसोलिनी को छुड़ाकर एक चमन समर्थक सरकार बनाई गई जर्मनी को इटली से निकालने के लिए लंबा युद्ध प्रारंभ हुआ सोवियत संघ को स्लोवाकिया और रोमानिया में प्रवेश कर चुका था और विजय हासिल कर रहा था।

यूरोप में युद्ध का अंत

जर्मन सेनाओं को 6 जून 1946 के बाद इंदौर से मित्र राष्ट्रों की सेनाओं का सामना करना पड़ा इटली में ब्रिटिश और अमेरिकी सेनाएं आगे बढ़ रही थी उत्तरी और पश्चिमी प्रांत तथा पेरिस नगर को मुक्त कराया जा चुका था और मित्र राष्ट्रों की सेनाएं बेल्जियम और हालैंड की ओर बढ़ रही थी पूर्वी मोर्चे पर जर्मन पस्त होते जा रहे थे पूर्व से सोवियत सेना तथा पश्चिम से अन्य मित्र राष्ट्रों की फौज जर्मनी के निकट आती जा रही थी।

2 मार्च 1945 ईस्वी को सोवियत सेनाएं बर्लिन में घुस गई उसी दिन हिटलर ने आत्महत्या कर ली जर्मनी ने 7 मई 1945 को बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया संपूर्ण यूरोप में 9 मई को दिन के 12:00 बजे सभी लड़ाइयां समाप्त हो गई।

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द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम करता था।

1 सितंबर 1939 को द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारंभ हुआ और 14 अगस्त 1945 को इसका अंत हुआ इतना व्यापक युद्ध विश्व के इतिहास में पहले और आज तक नहीं लड़ा गया इस युद्ध के परिणाम अत्यंत भयंकर हुए जिसे आप नीचे पढ़ सकते हैं।

द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम

1. जन-धन की हानि

द्वितीय विश्वयुद्ध में धन जन का कितना भीषण विनाश हुआ इसका ठीक-ठीक अनुमान अभी तक नहीं लगाया जा सका है लगभग एक लाख करो रुपए से अधिक धन का व्यय हुआ सबसे भयानक क्षति रूस की हुई ब्रिटेन में दो हजार करोड़ रुपए के मूल्य की संपत्ति का विनाश हुआ।
जर्मनी फ्रांस पोलैंड इत्यादि देशों की राष्ट्रीय संपत्ति के विनाश का कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता दोनों पक्षों के 5 करोड़ से अधिक लोग मारे गए अनेक देशों के आर्थिक एवं भौतिक संसाधनों की भी भारी क्षति हुई कई प्राचीन नगर पूरी तरह बर्बाद हो गए।

2. औपनिवेशिक साम्राज्यों का अंत

द्वितीय विश्वयुद्ध ने यूरोपीय राष्ट्रों को इतना शक्तिहीन बना दिया कि वे अपने उपनिवेश ओं को संभालने में असमर्थ हो गए अतएव उन्हें उन निवेशकों को छोड़ना पड़ा था इस युद्ध के बाद भारत बर्मा इंडोनेशिया मलाया आदि देश स्वतंत्र हो गए।

3. इंग्लैंड की शक्ति का ह्रास

इंग्लैंड के संदर्भ में कहा जाता था कि इसका सूर्य कभी अस्त नहीं होगा लैंड विश्व की सबसे बड़ी शक्ति माना जाता था इस युद्ध के बाद उसकी शक्ति में कमी हुई और उसे एक-एक कर अपने सभी उपनिवेशों को मुक्त करना पड़ा।

4. सोवियत रूस की शक्ति में वृद्धि

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सोवियत रूस की शक्ति में काफी वृद्धि हुई वह विश्व का दूसरा सबसे शक्तिशाली राष्ट्र माना जाने लगा।

5. अमेरिका के प्रभुत्व में वृद्धि

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका की शक्ति काफी बढ़ गई वह विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बन गया।

6. साम्यवाद का प्रसार

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद साम्यवाद का पर्याप्त प्रसार हुआ प्रथम विश्वयुद्ध के बाद संसार में केवल सोवियत रूस में ही साम्यवादी व्यवस्था थी लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पूर्वी यूरोप के अनेक देशों तथा चीन उत्तर कोरिया आदि एशियाई देशों में भी साम्यवादी व्यवस्था की स्थापना हुई द्वितीय विश्वयुद्ध का यह एक बेहद महत्वपूर्ण परिणाम था।

7. विश्व का दो गुटों में विभक्त होना

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका और सोवियत रूस में प्रभाव वृद्धि की ओर चल पड़ी और संसार के देश दो गुटों में विभाजित हो गए पूर्वी यूरोप चीन और दक्षिण पूर्वी एशिया सोवियत रूस की कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित होकर सोवियत रूस के प्रभाव क्षेत्र में आ गए।
दूसरी ओर पश्चिमी यूरोप तथा एशिया के कुछ देशों अमेरिका के प्रभाव क्षेत्र में आ गए संसार दो विचारधाराओं में विभाजित हो गया साम्यवादी गुट का नेता सोवियत रूस बना और पूंजीवादी गुट का नेता अमेरिका इसके बाद सोवियत रूस और अमेरिका में शीत युद्ध की स्थिति निर्मित हो गई इधर सोवियत रूस के विघटन के बाद शीतयुद्ध का युग समाप्त हो गया।

8. जर्मनी का विघटन

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी को दो भागों में बांट दिया गया पश्चिमी जन्मी और पूर्वी जर्मनी पश्चिमी जर्मनी इंग्लैंड अमेरिका तथा फ्रांस के संरक्षण में और पूर्वी जर्मनी सोवियत रूस के संरक्षण में रहे।

9. संयुक्त राष्ट्र संघ का संगठन

द्वितीय विश्व युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी ऐसी संस्था का संगठन जरूरी है जो पूर्ववर्ती राष्ट्र संघ से अधिक शक्तिशाली होता था जो विश्व में शांति कायम रख सके संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना इसी उद्देश्य से सन 1945 में हुई।

10. नए हथियारों का अन्वेषण तथा परमाणु बम का आविष्कार

विश्व युद्ध के दौरान अनेक नए घातक हथियारों का अविष्कार हुआ संयुक्त राज्य अमेरिका ने सबसे पहले परमाणु बम का इस्तेमाल इसी युद्ध के दौरान किया युद्ध की समाप्ति के बाद आणविक हथियारों का निर्माण के लिए देशों में होड़ मच गई और कुछ ही वर्षों में कुछ अन्य देशों ने भी आणविक हथियार विकसित कर लिए।
इसके अतिरिक्त अन्य नाभिकीय अस्त्रों का भी विकास हुआ जो जापान पर गिराए गए परमाणु बमों से भी हजारों गुना अधिक शक्तिशाली है अगर दुर्भाग्यवश कभी इनका उपयोग किया गया तो संपूर्ण विश्व ही नष्ट हो जाएगा इस तरह द्वितीय विश्वयुद्ध ने भविष्य में और भी भयंकर युद्ध की संभावनाएं पैदा की हैं और इससे बचने के लिए विश्वशांति और विश्व बंधुत्व की अनिवार्यताओं को भी स्पष्ट किया है।
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प्रथम विश्वयुद्ध का पूरा इतिहास जानें हिंदी में

प्रथम विश्वयुद्ध का इतिहास

सन 1914 में यूरोप में एक ऐसा युद्ध आरंभ हुआ जिसने पूरे विश्व को अपने प्रभाव क्षेत्र में समेट लिया इस युद्ध से जितना विनाश हुआ उतना मानव इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था सन 1914 में आराम होने वाला युद्ध एक सर्वव्यापी युद्ध था जिसमें युद्ध देशों ने अपने सारे संसाधन झोंक दिए इसका पूरी दुनिया का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ा इस युद्ध में असैनिक क्षेत्रों पर हुई बमबारी ओं से हुई तबाही अकाल और महामारी ओं से जितने आम लोगों की जानें गई उनकी संख्या युद्ध में मारे गए सैनिकों से कहीं अधिक थी इस अभूतपूर्व युद्ध ने दुनिया के इतिहास को एक नया मोड़ दिया।

इस युद्ध की लड़ाइयां यूरोप और एशिया अफ्रीका और प्रशांत क्षेत्र में लड़ी गई थी इसके वृहद फैलाव और इसकी सर्वांगी प्रकृति के कारण इसे विश्वयुद्ध कहा जाता है अति व्यापक दीर्घकालिक दुष्परिणाम देने वाले महायुद्ध को विश्व इतिहास में दो बार लड़े जा चुके हैं जिन्हें क्रमशः प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध कहते हैं।

प्रथम विश्व युद्ध के कारण

१.साम्राज्यवादी शक्तियों में आपसी कलह

युद्ध का मूल कारण थी साम्राज्यवादी देशों की आपसी प्रतिस्पर्धा और टकराव एशिया अफ्रीका के क्षेत्रों पर अधिकार करने के लिए यूरोप के साम्राज्यवादी देशों में टकराव होते रहते थे कभी कभी साम्राज्यवादी देश आपस में शांतिपूर्वक निपटारा कर लेते थे और एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग के बिना एशिया अफ्रीका के विभिन्न भागों को आपस में बांट लेते थे कई बार आपसी टकराव के कारण युद्ध की परिस्थितियां भी पैदा हो जाती थी।

19 वी सदी के अंत तक स्थिति बदल चुकी थी एशिया और अफ्रीका के अधिकांश भागों को साम्राज्यवादी देश आपस में बांट चुके थे और आगे विजय का एक ही रास्ता था कि किसी साम्राज्यवादी देश से उसके उपनिवेश जीने जाएं इसलिए उन्नीसवीं सदी के अंतिम दशक के बाद के दौर में साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा के कारण विश्व को पुनर विभाजित करने का प्रयास होने लगा जिसे युद्ध की परिस्थितियां पैदा हुई।

२. उननिवेशों के लिए संघर्ष

जर्मनी के एकीकरण के बाद उसका बहुत अधिक आर्थिक विकास हुआ 1914 के आते-आते वह लोहे और इस्पात तथा बहुत से औद्योगिक वस्तुओं के उत्पादन में ब्रिटेन और फ्रांस को बहुत पीछे छोड़ चुका था।

जर्मनी उपनिवेश ओं की दौड़ में बहुत बाद में शामिल हुआ था इसलिए उसे कम उपनिवेश हाथ लगे थे जर्मन साम्राज्य वादियों ने पूर्व में पांव फैलाने की सूची उसकी महत्वाकांक्षी थीपतनशील  उस्मानिया साम्राज्य की अर्थव्यवस्था पर अपना नियंत्रण स्थापित करना।

इसके लिए उसने बर लिंग से बगदाद तक एक रेल लाइन बिछाने की योजना बनाई इस योजना से ब्रिटेन फ्रांस और रूस डर गए क्योंकि इस रेल लाइन के तैयार होने पर उस्मानिया साम्राज्य से संबंधित उनकी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं को धक्का लगता

जर्मनी की तरह यूरोप की सभी प्रमुख शक्तियां और जापान की भी अपनी अपनी साम्राज्यवादी महत्व का उठाएं थी इटली जो एकीकरण के बाद फ्रांस जितना ही शक्तिशाली बन चुका था उत्तरी अफ्रीका स्थित त्रिपोली पर नजरें गड़ाए था जो मुसलमान या साम्राज्य का क्षेत्र था।

फ्रांस अफ्रीका के अपने साम्राज्य में मोरक्को को भी शामिल करना चाहता था रूस की ईरान कुस्तुनतुनिया समेत उस्मानिया साम्राज्य के इलाकों सुदूर पूर्व और अन्य जगहों से संबंधित अपनी महत्वाकांक्षाओं थी रूस की महत्वाकांक्षाओं का ब्रिटेन जर्मनी और ऑस्ट्रिया के हितों और महत्वाकांक्षाओं से टकराव हो गया रहा था।

जापान भी तब तक एक समाजवादी देश बन चुका था सुदूर पूर्व में उसकी अपनी महत्वाकांक्षाओं थी और वह इन्हें पूरा करने के लिए भी कदम उठा चुका था ब्रिटेन के साथ साथ एक समझौता करने के बाद उसने सन 1904 से 1905 में रूस को हराया जिससे सुदूर पूर्व में उसका प्रभाव बढ़ गया।

ब्रिटेन का दूसरे से सभी साम्राज्यवादी देशों से टकराव हो रहा था क्योंकि उसके पास पहले से ही एक बहुत बड़ा साम्राज्य था और उसकी रक्षा करना आवश्यक था जब कभी किसी देश की सख्ती बरती थी उसे ब्रिटिश साम्राज्य के लिए खतरा समझा जाता था।

ब्रिटेन का अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी बहुत फैला हुआ था इस व्यापार की रक्षा उसे प्रतियोगी देशों से करनी पड़ती थी साथ ही अपने साम्राज्य के व्यापार मार्गों की रक्षा करें भी करनी पड़ती थी उस्मानिया साम्राज्य के बारे में ऑस्ट्रिया की महत्वाकांक्षाओं की संयुक्त राज्य अमेरिका भी 19 वीं सदी के अंत तक एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभर चुका था ।

३.यूरोप में संघर्ष

यूरोप की प्रमुख शक्तियों के बीच उपनिवेश और व्यापार को लेकर टकराव तो थे ही साथ ही यूरोप के अंदर होने वाली कुछ घटनाओं को लेकर टकराव थे उस समय यूरोप में छह प्रमुख शक्तियां थी ब्रिटेन जर्मनी ऑस्ट्रिया हंगरी रूस फ्रांस और इटली एक प्रश्न जिसमें यह सभी देश उलझ गए वह था यूरोप के बाल्कन प्रायद्वीप के देशों का प्रश्न बाल्कन प्रायद्वीप के देश उस्मानी साम्राज्य के अधीन थे मगर 19वीं सदी में उस्मानी साम्राज्य का पतन आरंभ हो चुका था।

स्वाधीनता के लिए अनेक जातियां इस साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह कर रही थी रूस के जोड़ों को आशा थी कि इन क्षेत्रों से उस्मानी तुर्की का शासन समाप्त होने के बाद यह रूस नियंत्रण में आएंगे।

उन्होंने सर्वस लाओ नामक एक आंदोलन को बढ़ावा दिया जो किस सिद्धांत पर आधारित था कि पूर्वी यूरोप के सभी चलाओ एक जन्म के लोग हैं इस्लाम ऑस्ट्रिया हंगरी के अनेक क्षेत्रों में भी रहते थे इसलिए रूस ने उस्मानिया साम्राज्य और ऑस्ट्रिया हंगरी दोनों के खिलाफ आंदोलन को बढ़ावा दिया।

४. गुटों का निर्माण

यूरोप में उपनिवेश ओं को लेकर होने वाले दिन टकराव का वर्णन किया जा चुका है उनके कारण उन्नीसवीं सदी के अंतिम दर्शक और उसके बाद के काल में यूरोप में तनाव की स्थिति पैदा हो गई यूरोप के देश अब परस्पर विरोधी गुटों में शामिल होने लगे अपनी सैनिक शक्ति बढ़ाने अपनी सेनाओं और नौसेना की संख्या बढ़ाने और पहले से अधिक घातक हथियार विकसित करने तथा आमतौर पर युद्ध की तैयारी करने पर व्यापार धन खर्च करने लगे बीसवीं सदी के पहले दशक में इन देशों के दो परस्पर विरोधी गुट बन गए अरे आपने अपनी सैनिक शक्ति के साथ एक दूसरे का मुकाबला करने के लिए तैयार हो गए किन देशों ने मिलकर 1882 में एक त्रिगुट बना लिया था जिसमें जर्मनी और इटली शामिल थे।

मगर इस गुट के प्रति इटली की वफादारी संदिग्ध की क्योंकि उस का मुख्य उद्देश्य यूरोप में ऑस्ट्रिया हंगरी से कुछ इलाके चिन्ना और फ्रांस की सहायता से त्रिपोली को जीतना था इसी गुट के विरोध में फ्रांस रूस और ब्रिटेन नेशन हारना सब साथ में एक त्रिदेसीय संधि की।

युद्ध में ठीक पहले के वर्षों में एक के बाद एक संकट आए इन संकटों के कारण यूरोप में तनाव और कड़वाहट में भीगी हुई और राष्ट्रीय श्रेष्ठता बाद का जन्म हुआ यूरोपीय देश दूसरे के इलाकों को पाने के लिए आपस में गुप्त समझौते भी करने लगे इन समझौतों का असर ही भंडाफोड़ ना जाता था नहीं लेकर हर देश में भय और शंका का वातावरण भी लिखा हो जाता था ऐसे में अर्जुन कर्ण युद्ध की घड़ी और बिपाशा गई।

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प्रथम विश्व युद्ध का आरंभ और तात्कालिक कारण

प्रथम विश्व युद्ध का आरंभ और तात्कालिक कारण युद्ध का आरंभ एक मामूली घटना से हुआ अगर यूरोप वर्षों से युद्ध की तैयारी कर रहे दो परस्पर विरोधी सैनिक शिविरों में 9 बटा होता तो इस घटना से कोई खास तहलका नहीं मचता। 28 जून सन 1914 आर यू खांसी फर्डीनांड की बोस्निया की राजधानी में हत्या हो गई फर्डीडिनांड ऑस्ट्रिया हंगरी की गद्दी का उत्तराधिकारी था ऑस्ट्रेलिया ने इस हत्या में सरबिया का हाथ देखा और अपनी कुछ मांगे उस पर थोप दी ना मानने पर युद्ध की चेतावनी दी।

सर्बिया ने इस एक मांग को मानने से इंकार कर दिया क्योंकि वहां उसकी पूर्ण स्वतंत्रता के विरुद्ध था खुलता 28 जुलाई 1914 ईस्वी को ऑस्ट्रेलिया ने सर्विया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी रूस ने सर्बिया को पूर्ण सहायता का वादा किया था इसलिए वह भी युद्ध की तैयारी करने लगा जर्मनी ने 1 अगस्त को रूस और 3 अगस्त को फ्रांस के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की 5:00 पर दबाव डालने के लिए जर्मन सेना 4 अगस्त को बेल्जियम में घुस गई उसी दिन ब्रिटेन ने भी जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

अनेक दूसरे देश की लड़ाई में शामिल हो गए सुदूर पूर्व में जर्मनी के उपनिवेश हथियाने के उद्देश्य से जापान ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी तुर्की और बुल्गारिया जर्मनी की तरफ हो गए टी गुटका सदस्य होने के बावजूद इडली कुछ समय तक बना रहा 1915 ईस्वी में वह जर्मनी और ऑस्ट्रिया हंगरी के विरुद्ध युद्ध में शामिल हुआ मित्र राष्ट्रों के लिए यह ऐसा महान लाभ था जिससे शक्ति का पल्ला उनकी ओर झुक गया।

प्रथम विश्वयुद्ध की प्रमुख घटनाएं

१. युद्ध का आरंभ

जर्मनी को आशा थी कि वह बेल्जियम पर बिजली की तरह मार कर के वह फ्रांस पर हमला करते क्रश और उसे कुछ ही हफ्तों में हरा देगा तब हर उस से उड़ जाएगा कुछ समय तक ऐसा लग रहा था कि यह योजना सफल हो रही है जर्मन सेना पेरिस से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी आज तक आ पहुंची।

रोशनी जर्मनी और ऑस्ट्रिया पर हमले आरंभ कर दिए थे इसलिए कुछ सम्मन सेना पूर्वी मोर्चे पर भी भेजनी पड़ी जल्दी फ्रांस की तरफ सेनाओं का बढ़ना रुक गया और यूरोप में युद्ध में लंबे समय के लिए गतिरोध पैदा हो गया इस बीच युद्ध दुनिया के कई दूसरे भागों तक फैल गया और पश्चिमी एशिया अफ्रीका और सुदूर पूर्व में भी लड़ाइयां होने लगी।

जर्मन सेनाओं का बढ़ना रुक जाने के कारण के बाद एक नए प्रकार का युद्ध आरंभ हो गया पर इस पर भीड़ रही थी ना एक दिन खुद कर वहां से एक दूसरे पर छापा मारने लगी पूर्वी मोर्चे पर ऑस्ट्रेलिया को रूस के हमले असफल बनाने और रूसी साम्राज्य के कुछ भागों पर कब्जा करने में सफलता मिली।

यूरोप से बाहर पुलिस जन्मोत्सव कोटा मियां और अरब में उस्मानी साम्राज्य और जर्मनी तथा तुर्की के विरुद्ध अभियान संगठित किए गए जर्मनी तथा तुर्की के विरुद्ध भी अभियान संगठित किए गए जो ईरान में अपना प्रभाव स्थापित करना चाहते थे पूर्वी एशिया में जापान ने जर्मनी के अधिकार क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया और अफ्रीका में ब्रिटेन तथा फ्रांस ने अधिकांश जर्मन उपनिवेश हथिया लिए।

२. युद्ध में नए एवं भयंकर हथियारों का प्रयोग

इस युद्ध में अनेक नए हथियारों का उपयोग किया गया इस तरह के दो हथियार से मशीनगन और तरल अग्नि मींस लिक्विड फायर युद्ध में पहली बार आम जनता को मारने के लिए हवाई जहाजों का उपयोग किया गया अंग्रेजों ने टैंकों का प्रयोग किया जो आगे चलकर युद्ध के प्रमुख हथियार बन गए दोनों युद्ध रत गुटों ने एक-दूसरे तक खाद्यान्न कारखानों के कच्चे माल तथा हथियारों को पहुंचने से रोकने की कोशिश की।

इस काम में समुद्री युद्ध की भूमिका रही जर्मनी ने बड़े पैमाने पर यू गोट नामक पनडुब्बियों का उपयोग किया इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के जहाजों को ही नहीं बल्कि ब्रिटिश बंदरगाहों की ओर बढ़ रही नावो को भी नष्ट करना था।

३. संयुक्त राज्य अमेरिका का युद्ध में शामिल होना

6 अप्रैल सन 1917 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की यद्यपि अमेरिका दोनों गुटों के देशों के लिए हथियारों और दूसरी आवश्यक परिस्थितियों का प्रमुख स्त्रोत बन चुका था किंतु 1915 ईसवी जर्मनी युवक ने उसी तान्या नामक एक बेटी जहाज को डुबो दिया था मरने वाले 1153 यात्रियों में 128 अमेरिकी भी थे।

इस घटना के बाद अमेरिका में जर्मन विरोधी भावनाएं भड़क उठे और अमेरिका भी युद्ध में शामिल हो गया।