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साम्राज्यवाद क्या है साम्राज्यवाद का अर्थ

साम्राज्यवाद का अर्थ

जब कोई शक्तिशाली राष्ट्र किसी दुर्बल राष्ट्र के आर्थिक एवं राजनीतिक जीवन पर नियंत्रण स्थापित कर उनका शोषण करता है तो उसे साम्राज्यवाद कहते हैं दूसरे शब्दों में जब कोई राष्ट्र शक्ति का प्रयोग कर किसी अन्य राष्ट्र पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लेता है तथा उसके आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों का हनन करके उसे अपने नियंत्रण में ले लेता है तो ऐसा राष्ट्र साम्राज्यवादी कहलाता है और इस प्रवृत्ति को साम्राज्यवाद कहते हैं।

साम्राज्यवाद की परिभाषा

साम्राज्यवाद वह अवस्था है जिसमें पूंजीवादी राज्य शक्ति के बल पर दूसरे देशों के आर्थिक जीवन पर अपना नियंत्रण स्थापित करते हैं
                                 – डॉ. संपूर्णानंद

शक्ति और हिंसा के द्वारा किसी राष्ट्र के नागरिकों पर विदेशी शासन तक नहीं साम्राज्यवाद है।
                                              – शूमां

साम्राज्यवाद के विकास की अनुकूल परिस्थितियां

१. औद्योगिक क्रांति
अब तक एशिया और अफ्रीका के देशों में औद्योगिक क्रांति नहीं आई थी यहां होने वाले उत्पादन का उपयोग प्राचीन ढंग से हाथों द्वारा ही होता था अतः यहां पर साम्राज्यवादी देशों के लिए उपयुक्त बाजार एवं कच्चा माल उपलब्ध था।

२. सैन्य शक्ति कमजोर
एशिया एवं अफ्रीका के देश सैनिक दृष्टि से अत्यधिक कमजोर थे वे यूरोपीय शक्ति के आगे टिक नहीं सकते थे ना तो उनके पास आधुनिक हथियार होते थे और ना ही संगठन की शक्ति उन्हें प्रशिक्षण भी ऐसा नहीं दिया जाता था कि वे सक्षम सैनिकों या प्रशिक्षित सेनाओं का मुकाबला कर सके।

३. राष्ट्रीय एकता का अभाव
पश्चिमी देशों की तरह एशिया और अफ्रीका के राज्य एकता के सूत्र में बंधे हुए नहीं थे वह आपसी स्वार्थों को लेकर आपस में लड़ते झगड़ते थे वह कभी संगठित होकर बाहरी शत्रु का सामना नहीं करते थे।

४. मध्यमवर्ग का आभाव
एशिया एवं अफ्रीका के देशों में प्रभावशाली मध्यमवर्ग का अभाव था जनसाधारण राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहता था उसे अपनी रोजी रोटी जुटाने में इस सारी शक्ति लगानी पड़ती थी।

५. राजनीतिक अस्थिरता
शासक वर्ग अपनी विलासिता में डूबा रहता था प्रजा हित के कार्यों में उसकी जरा भी रुचि न थी जनता भी अपने शासकों के प्रति सहानुभूति नहीं रखती थी आए दिन विद्रोह और षडयंत्र एवं मारकाट होते रहते थे इससे प्रशासन की जड़ें कमजोर हो गई थी।

साम्राज्यवाद के प्रभाव

19वीं सदी के अंतिम दशक तक साम्राज्यवाद ने एशिया और अफ्रीका की पूरी तरह अपने पंजों में जकड़ लिया था विश्व की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या पर विदेशी शासकों ने अपना अधिकार कर लिया था साम्राज्यवाद का प्रभाव लोगों पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही रूपों में पड़ा था।

सकारात्मक प्रभाव:-

१. राष्ट्रीय एकीकरण
साम्राज्यवादी देशों ने अपने उपर निवेशकों में एक ही तरह के कानून न्याय व्यवस्था और आर्थिक नीति लागू की साम्राज्यवादी देश पूरे उपनिवेश को एक राजनीतिक और आर्थिक इकाई मानकर शासन करते थे जिसके फलस्वरूप उपनिवेश की जनता में एकता और राष्ट्रीयकरण की भावना उत्पन्न हुई हमारा भारत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

२. यातायात और संचार के साधनों में सुधार
अपनी उपनिवेशन का पूरी तरह से शोषण के लिए साम्राज्यवादी देशों में उपनिवेश ओं में यातायात एवं संचार के साधनों में सुधार किया जिसके फलस्वरूप निवेशकों को नवीन यातायात और संचार के साधन प्राप्त हुए और वहां पर रेलवे एवं टेलीफोन जैसे साधनों का विकास हुआ।

३. आंशिक उदारीकरण
यूरोप की पूंजी पतियों का था सरकार ने अधिक लाभ कमाने के लिए निवेशकों में कुछ आधुनिक उद्योग भी लगाए।

४. पाश्चात्य शिक्षा का प्रसार
औपनिवेशिक देशों में अपने व्यापार व उद्योगों को चलाने के लिए बहुत अधिक संख्या में कलर को एवं छोटे कर्मचारियों की आवश्यकता को देखते हुए साम्राज्यवादी देशों ने वहां पर पाश्चात्य ढंग की शिक्षा भाषा एवं साहित्य का प्रचार प्रसार किया इसके फलस्वरूप उपनिवेश ओं में पश्चिमी विचारधारा का प्रचार हुआ सांची वहां स्वतंत्रता समानता तथा लोकतंत्र के प्रति प्रेम विकसित हुआ।

५. नए प्रदेशों की खोज
साम्राज्यवाद के प्रसार के कारण विश्व के अनेक नए प्रदेशों की खोज की गई साम्राज्य वादियों ने वहां पर अपनी उपनिवेश बताएं जिससे विश्व के विभिन्न भागों में सभ्यता और संस्कृति का आदान-प्रदान हुआ।

नकारात्मक प्रभाव

१. आर्थिक शोषण

साम्राज्यवादी देश एशिया और अफ्रीका के देशों से सस्ते दामों पर कच्चा माल उठाते और फिर तैयार माल उन्हीं देशों में ऊंचे दामों पर बेचकर भारी लाभ कमाते थे और कृषि क्षेत्र में भी उन्होंने बहुत ज्यादा शोषण किया।

२. आर्थिक पिछड़ापन

साम्राज्यवादी देशों द्वारा अपने उपनिवेश ओं की कृषि और उद्योग एवं व्यापार के विकास में कोई रुचि नहीं ली जाती थी बस उनसे सिर्फ काम करवा कर बहुत ही  कम मजदूरी दिया जाता था।

३. निरंकुश शासन

साम्राज्यवादी देश अपने देश में स्वतंत्रता समानता आदि की बात करते थे किंतु अपने ही उपनिवेश ओं में उनका व्यवहार निरंकुश तथा दमनात्मक रहता था।

४. युद्ध और अशांति

यूरोपीय देश अधिक से अधिक उपनिवेश प्राप्त करना चाहते थे जिसके कारण वे आपस में लगातार युद्ध करने की स्थिति में रहते थे वह सभी जानते थे कि अधिक उपनिवेश रखने से अधिक मात्रा में कच्चा माल प्राप्त करने के स्त्रोत तथा माल बेचने के लिए बाजार उपलब्ध होंगे।

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संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की भूमिका कैसी है ।

1. संघ की स्थापना और चार्टर निर्माण में

सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में भाग लेकर भारत उनका मन संस्थापक देशों में से एक सदस्य बना मानव अधिकार और मौलिक स्वतंत्र गांव को भारतीय प्रतिनिधियों की सिफारिश पर चार्टर में जोड़ा गया।

2. संघ की सदस्य संख्या बढ़ाने में

संघ में अपने विरोधी गुट को प्रवेश देने में कई देश रुकावट डालते थे परंतु भारत ने अपने आक्रमणकारी चीन के परिवेश का समर्थन कर संघ की सदस्य संख्या बढ़ाने में प्रेरक कार्य किया।

3. संघ के विभिन्न अंगों का संचालन में

सन 1954 में भारत की सिम की विजय लक्ष्मी पंडित संयुक्त राष्ट्र महासभा के आठवीं अधिवेशन के अध्यक्ष निर्वाचित हुई

डॉ राधाकृष्णन और मौलाना अब्दुल कलाम आजाद यूनेस्को के प्रधान निर्वाचित हुए राजकुमारी अमृत कौर विश्व स्वास्थ्य संगठन डॉ बी आर सी एन विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन बाबू जगजीवन राम अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन डॉ एच जे भाभा अणुशक्ति आयोग के अध्यक्ष डॉ चिंतामणि देशमुख अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अध्यक्ष डॉ नागेंद्र सिंह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश जाकर संघ के संचालन में सहयोग कर चुके हैं।

4.संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति व सुरक्षा संबंधी कार्य

1. कोरिया समस्या

उत्तर और दक्षिण कोरिया के युद्ध में विश्वयुद्ध की
संभावनाएं बढ़ रही थी संयुक्त राष्ट्र ने वहां शांति स्थापित करने 16 राष्ट्रों की सेना भेजी उस में भारतीय सैनिक भी शामिल थे जिन्होंने युद्ध बंदियों की अदला बदली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2. हंगरी समस्या

1956 में प्रतिक्रियावादी तत्वों ने हंगरी में विद्रोह कर दिया हंगरी सरकार के अनुरोध पर रूस ने सेना भेजकर विद्रोह को दबा दिया संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत के हंगरी में शांति स्थापना के प्रयासों का समर्थन किया।

3. स्वेज नहर समस्या

26 जुलाई 1956 को मिश्र ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया स्वेज नहर पर अपना अधिकार भी स्थापित करने के लिए इंग्लैंड फ्रांस और इजरायल ने मिस्र पर आक्रमण कर दिया भारत ने इन आक्रमणकारी देशों की निंदा कर युद्ध बंद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

4. कांगो समस्या

कांगो के स्वतंत्र होने पर बेल्जियम ने उस पर हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया संयुक्त राष्ट्र संघ के आदेश से भारत ने अपनी सेना की बड़ी टुकड़ी भेजकर कांगो में युद्ध के खतरे को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

5. निशस्त्रीकरण हेतु किए गए प्रयास

भारत ने सहयोगी देशों की मदद से सन 1961 में महासभा में आणविक परीक्षणों को बंद करने का प्रस्ताव रखा 1963 में ब्रिटेन अमेरिका और सोवियत रूस के आणविक परीक्षण प्रतिबंध संधि का भारत ने स्वागत किया सन् 1986 में राजीव गांधी ने महासभा में निशस्त्रीकरण की पुल की और सन 1988 से 22 जून तक एक चरणबद्ध कार्यक्रम चलाकर तहत पूर्ण का सुझाव दिया।

6. रंगभेद के विरुद्ध संघर्ष

अफ्रीका और रोड एशिया की गोरी सरकारों द्वारा श्वेतांबर किए जाने वाले अत्याचारों का भारत में प्रबल विरोध किया साथ ही संयुक्त राष्ट्र संघ पर भी भारत ने इस हेतु लगातार दबाव बनाए रखा अल्लाह 22 दिसंबर 1993 में अफ्रीका नेताओं को भी बराबरी का अधिकार मिल गया।

7. उपनिवेशवाद समाप्ति हेतु किए गए प्रयास

भारत में उपनिवेशवाद की समाप्ति और वहां की जनता की स्वतंत्रता के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ में जो प्रस्ताव रखा उसे स्वीकार कर लिया गया बांग्लादेश और नामीबिया को मुक्त कराने भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

8. मानव अधिकारों की रक्षा

भारत मानव अधिकारों का सदैव समर्थक रहा 21 दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकार आयोग का गठन किया भारत ने उच्चायोग के सुझावों को मान्यता दी यह संयुक्त राष्ट्र महासचिव और महासभा के अधीन काम करते हुए नागरिक सामाजिक सांस्कृतिक और अन्य सभी प्रकार के मानव अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने के लिए उत्तरदाई है।

9. आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को हल करने में

भारत में संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से आर्थिक दृष्टि से पिछड़े देशों पर विशेष बल दिया विकसित देशों से अविकसित देशों के लिए अधिकाधिक आर्थिक सहायता देने का अपील की 24 अक्टूबर 1985 में राजीव गांधी ने महासभा के सदस्य देशों से अपील की कि विश्व के शांति के प्रति स्वयं को समर्पित करते हुए विश्व भुखमरी को दूर करने के लिए संघर्ष करें।

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Colonialism

अफ्रीका का उपनिवेशी करण का इतिहास

हमने अमेरिका में अफ्रीकी देशों को बसाई जाने के बारे में पहले ऊपर पढ़ लिया है यूरोपीय देशों द्वारा अफ्रीका के उपनिवेश ई करण की शुरुआत सन 19 वीं सदी के मध्य में हुई 1878 तक अफ्रीका की केवल 10% जमीन पर यूरोपीय देशों का कब्जा था लेकिन महज 36 वर्षों में 1914 तक लगभग सारा महावीर किसी न किसी यूरोपीय देश का उपनिवेश बन गया।

दास व्यापार

उन्नीसवीं सदी के मध्य तक अफ्रीका में ज्यादातर हिस्से कली लाई समूहों से आवा था जीवन यापन के लिए मुख्य साधन पशुपालन कृषि जंगल से इकट्ठे किए गए कंदमूल एवं शिकार होते थे मध्य काल में भारत पश्चिमी एशिया और यूरोप में भी अफ्रीका महाद्वीप देशों की आपूर्ति के मुख्य स्त्रोत के रूप में जाना जाता था।

कबीलाई समूह के आपसी झगड़े में जो लोग युद्ध बंदियों के रूप में पकड़े जाते थे उनको दास के रूप में भेज दिया जाता था सन 1500 के बाद उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में खेती करने के लिए जैसे जैसे मजदूरों की जरूरत पड़ी वैसे वैसे अफ्रीका महाद्वीप से ताशों का व्यापार भी बढ़ता चला गया।

कई यूरोपीय देश इस अति लाभदायक मानव व्यापार में लग गए और करोड़ों अफ्रीकी यों को बेचकर खूब मुनाफा कमाया 450 साल से अधिक चले इस व्यापार को सन 1800 और सन 1900 के बीच धीरे-धीरे बंद किया गया।

मजेदार बात यह है कि अब यूरोपीय देश या कहने लगे कि अफ्रीका में दास व्यापार को खत्म करने के लिए उन्हें अफ्रीका पर अपना राज्य बनाने की जरूरत है उनमें अब होल्ड लग गई कि कौन अफ्रीका में सबसे अधिक जमीन पर कब्जा कर पाता है।

औद्योगिक क्रांति साम्राज्यवादी होड और अफ्रीका

ब्रिटेन जैसे प्रारंभिक देश ने अपने उद्योगों के लिए कच्चे माल एवं बाजार की तलाश में दुनिया के बड़े हिस्से पर खासकर एशियाई देशों पर कब्जा कर लिया था जर्मनी फ्रांस और इटली में औद्योगिक क्रांति लगभग 100 साल बाद हुई।

इन नव उद्योग देशों के लिए अफ्रीका ही एक ऐसा क्षेत्र था जिस पर कब्जा करने की संभावना थी।

वर्चस्व वादी विचारधारा 

यूरोप में इस समय कुल ऐसे विचार लोकप्रिय हो रहे थे जो यूरोपीय देशों को ज्यादा से ज्यादा उपनिवेश बनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे उपनिवेश बनाना राष्ट्रीय शक्ति का पर्याय समझा जाता था और उपनिवेश के प्रसार के लिए काम करना राष्ट्रप्रेम की अभिव्यक्ति मानी जाती थी।

यूरोप में बहुत से लोगों का मानना था कि विश्व में मनुष्यों की कई नस्लें होती है और यूरोपीय नस्ल बाकी दुनिया की नस्लों से बेहतर है।

यह मानना कि मनुष्य की नस्लें होती है और एक नस्ल को दूसरी नस्ल से बेहतर माना नस्लवाद का जाता है नस्लवादी यह भी मानते हैं कि श्रेष्ठ नस्ल के लोगों का कमजोर नसों पर राज करना या उनका शोषण करना जरूरी और स्वाभाविक है।

अफ्रीका के दक्षिणी इलाकों में जैसे-जैसे दक्षिण अफ्रीका जिंबाब्वे आदि में कई यूरोपीय लोग जाकर बसें यहां तक कि भारत से भी बहुत से लोग वहां जाकर बसें।

वे सब अपने आप को स्थानीय श्वेत लोगों से श्रेष्ठ समझते थे और उन्हें कई बार विशेषाधिकार प्राप्त थे वह जहां प्रयास करते रहे कि विभिन्न मूल के लोगों का आपस में मेल मिलाप ना हो और नस्ला आधारित विशेषाधिकार बने रहें इससे रंगभेद की नीति बनी जो सन 1994 तक चली।

औपनिवेशिक काल में एक और विचार गोरे लोगों का भुजा बहुत लोकप्रिय हुआ था इस विचार के अनुसार दूसरे महाद्वीप के लोग पिछड़े हुए हैं इसलिए यूरोप के लोगों का नैतिक दायित्व है कि उन लोगों को सभ्य बनाया जाए।

इस विचार के अनुसार यूरोपीय देशों का यह कर्तव्य है कि विशेष संसार के देशों को ज्ञान और धर्म के मुद्दों पर पथ प्रदर्शित करें इस विचार को उत्साहित होकर बहुत से लोग अफ्रीका में इस आई या फिर आधुनिक विज्ञान वह तार्किक सोच के प्रचार-प्रसार में भी लग गए।

फरान जैसे कई यूरोपीय देश अपने उपनिवेश ओं में अफ्रीकी लोगों का एक ऐसा समूह तैयार करना चाहते थे जो यूरोपीय भाषा और संस्कृति धर्म और विचारों को अपनाने और औपनिवेशिक शासन की मदद करें इस उद्देश्य से अफ्रीका में कई यूरोपीय विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थान खोले गए।

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WordPress plugin

बिजनेस वेबसाइट के लिए कौन से plugin बेहतरीन है

 1. WPForms

यह पैकिंग बिजनेस वेबसाइट का एक बेहतरीन उपकरण माना जाता है हर वेबसाइट को एकदम पर फोन किया सकता होती है क्योंकि बिजनेस वेबसाइट पर विजिट करने वाले लोगों के बारे में जानकारी आसानी से आप तक पहुंच सकती है इसके लिए जैसे ही कोई आगंतुक आपकी वेबसाइट पर आता है तो उसके सामने यह फॉर्म खुलता है जब यह व्यक्ति अपनी जानकारी इस फोन के जरिए आप तक पहुंचाता है तो आप इस व्यक्ति से आसानी से संपर्क कर सकते हैं और अपने व्यापार संबंधित बातचीत कर सकते हैं


 2. Yoast SEO

स्किन की माध्यम से आप अपनी वेबसाइट पर ज्यादा से ज्यादा विजिटर ला सकते हैं तथा वेबसाइट को गूगल पर रंग करवा सकते हैं यह सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन उपकरण काफी अनुकूल plugin माना जाता है

Yoast SEO अब तक के सबसे लोकप्रिय WordPress plugin में से एक है। वर्डप्रेस उपयोगकर्ता सबसे ज्यादा इस उपकरण की माध्यम से अपनी वेबसाइट को रैंक करवाते हैं यह उपकरण चलाने में काफी आसान तथा आसानी से इस उपकरण के माध्यम से अपनी वेबसाइट को नहीं कराया जा सकता है इसीलिए यह उपकरण लोगों की पहली पसंद बन चुका है  सभी वर्डप्रेस एसईओ प्लगइन्स में से, योस्ट उन सभी सुविधाओं और उपकरणों के साथ सबसे व्यापक समाधान प्रदान करता है जिन्हें आपको अपने ऑन-पेज एसईओ में सुधार करने की आवश्यकता होती है।
 3.  लगातार संपर्क

ई-मेल आपके व्यवसाय के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है बिजनेस वेबसाइट के लिए ईमेल फॉर्म वेबसाइट पर रखना बहुत ही लाभदायक तथा विजिटर से प्रभारी तरीके से विश्वसनीय संबंध बनाए जा सकते हैं यह आपको अपनी वेबसाइट पर आने वाले विजिटर में एक रिलेशन पैदा करता है जिससे आप विजिटर की ईमेल आईडी से उस से कोंटेक्ट में रह सकते हैं यह आपको अपनी वेबसाइट छोड़ने के बाद भी अपने उपयोगकर्ताओं के साथ संपर्क में रहने की अनुमति देता है।  यही कारण है कि हम प्रत्येक व्यवसाय स्वामी को तुरंत एक ईमेल सूची बनाने की सलाह देते हैं।

 4. UpdateraftPlus

UpdateraftPlus बाजार का सबसे लोकप्रिय बैकअप उपकरण माना जाता है इस उपकरण की सहायता से आप अपने बिजनेस वेबसाइट पर डाली गई सभी पोस्ट तथा इमेज का बैकअप लेकर  रख सकते हैं  ताकि कभी  आपकी वेबसाइट इन एक्टिव हो जाए तो उसे पुनः एक्टिव करने में  सहायता हो सकती है यह बाजार पर सबसे लोकप्रिय वर्डप्रेस बैकअप प्लगइन है।  यह आपको स्वचालित बैकअप सेट करने और Google ड्राइव, ड्रॉपबॉक्स, S3, रैकस्पेस, एफ़टीपी, ईमेल, आदि जैसे दूरस्थ स्थान पर सुरक्षित रूप से संग्रहीत करने की अनुमति देता है।
 5. WP रॉकेट

वर्डप्रेस राकेट बाजार मैं वर्डप्रेस  कैशिंग उपकरण माना जाता है। यह उपकरण वेबसाइट की गति तथा स्पीड को नियंत्रित करता है अगर आप एक ब्लॉगर है या आपकी कोई बिजनेस वेबसाइट है जिस पर आप अपना बिजनेस कर रहे हैं तो उस वेबसाइट की स्पीड आपके व्यवसाय तथा वेबसाइट के रैंक करने में काफी ज्यादा इफेक्ट करती है इसीलिए आप की वेबसाइट की स्पीड ज्यादा होनी चाहिए जिससे आने वाली विजिटर लोडिंग टाइम कम होने के कारण आपकी वेबसाइट की ओर अपना इंटरेस्ट दिखा सके  |

यह स्वचालित रूप से अनुशंसित वर्डप्रेस कैशिंग सेटिंग्स जैसे कि जीज़िप संपीड़न, पेज कैश और कैश प्री-लोडिंग को चालू करता है।  आप पेज लोड समय को और बेहतर बनाने के लिए आलसी लोडिंग इमेज, सीडीएन सपोर्ट, डीएनएस प्री-क्लचिंग, मिनिफिकेशन जैसी वैकल्पिक सुविधाओं को भी चालू कर सकते हैं। 

आज आपने क्या सिखा बिज़नस वेबसाइट प्लगइन के बारे में 

मुझे उम्मीद है, की आपको अब बिज़नस वेबसाइट पर कौन से प्लगइन यूज़ करने सबसे better साबित होगा, इस टॉपिक्स से रिलेटेड कोई सवाल हो, तो कमेंट करके आप हमसे पूछ सकते है, 

तो दोस्तों अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो प्लीज इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर से जरूर शेयर करे, 
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On Page SEO क्या है? Step By Setp पूरी जानकारी हिंदी में

On Page SEO क्या है?

On Page SEO वेबसाइट को गूगल में रैंक करवाने के लिए काफी मदद करता है। इस SEO में आपको वेबसाइट पर डाले जाने वाले आर्टिकल का SEO करना होता है। अगर आपके आर्टिकल का 100% SEO हो तो आपकी वेबसाइट गूगल पर रैंक करने में काफी आसानी हो जाती है। और आपकी साइड की रैंकिंग भी काफी अच्छी रहती है। SEO के अंदर कई टिप्स को फॉलो करना पड़ता है। और उन्हीं टिप्स की मदद से आप On Page SEO को आसानी से कर सकते हैं।


On Page SEO कैसे किया जाता है?

On Page SEO करने के लिए आर्टिकल का SEO करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। और आर्टिकल का SEO आपकी वेबसाइट की DA/PA (Domain Authority/ Page Authority) और वेबसाइट की रैंकिंग अच्छी रखता है। On Page SEO करना बिल्कुल आसान होता है और इसको करने में ज्यादा समय भी नहीं लगता है। आइए जानते हैं पूरा विस्तार से स्टेप बाय स्टेप.

Yoast SEO के मुताबिक On Page SEO कैसे करें।

Yoast SEO Plugin के मुताबिक आर्टिकल का आॅन पेज एसईओ कैसे किया जा सकता है। और आर्टिकल को गूगल पर आसानी से रैंक भी किया जा सकता है। Yoast SEO Plugin दो प्रकार के होते हैं. पहला :- Free Yoast SEO Plugin दूसरा :- Primum Yoast SEO Plugin

1. Free Yoast SEO Plugin

Free Yoast SEO Plugin के अंदर आप आर्टिकल का Basic SEO कर सकते हैं। और आर्टिकल को गूगल पर रैंक करवा सकते हैं। इस Plugin के अंदर आपको Totally 14 टास्क होते हैं। जिनको कंप्लीट करना रहता है। इनमें से मुख्य चार टास्क होते हैं। जो एसक्यू को ग्रीन करने में हेल्प करते हैं। और 5 टास्क आर्टिकल की Redability को ग्रीन करने के लिए होते हैं।

SEO 14 Task’s:-


(1.) outbound Link’s:- इस Task के अंदर आपको अपने आर्टिकल के अंदर एक कोई ऐसे वर्ड का लिंक बनाना है।जो लिंक आपकी वेबसाइट से बाहर की हो। यानी किसी दूसरी वेबसाइट के लिंक आपके वेबसाइट में डालनी हो। वह भी किसी एक word के ऊपर मैं आपको Recomment करूंगा कि आप ज्यादातर कोशिश करें. कि विकिपीडिया की ही लिंक डालें.

(2.) Internal Link’s:- इस Task के अंदर आपको अपनी ही वेबसाइट के किसी दूसरे आर्टिकल की लिंक इस आर्टिकल में डालने को बोला जाता है। यानी कि आपकी वेबसाइट पर पहले किसी भी आर्टिकल को अगर आप डाल रखा है। तो उसी आर्टिकल की लिंक को इस आर्टिकल में डाल देंगे। तो आपका यह तर्क भी कंप्लीट हो जाएगा।

(3.) Meta Description:- इस Task के अंदर आपको अपने आर्टिकल का Meta Description बनाना होता है। इसके अंदर आप अपने आर्टिकल के सबसे पहले पैराग्राफ में से 35 word को सिलेक्ट करके मेटा डिस्क्रिप्शन के बॉक्स के अंदर डालते हैं। इतना करने के बाद आपका यह टास्क भी Secessfully Complete हो जाएगा।

(4.) Image ALT Taxt:- इस Task के अंदर आपको अपने आर्टिकल के अंदर डाले जाने वाले फोटो का ALT Taxt डालना रहता है। यानी आप जब अपने आर्टिकल का फीचर फोटो डालते हो। तो साइड में आपको चार बॉक्स देखने को मिलते हैं। जिसमें पहला नंबर ALT Taxt दूसरा नंबर Title तीसरा Caption और चौथा Description होता है। इन चारों को आपको फील करना होता है। और यह फील करने के बाद आपका यह टास्क भी कंप्लीट हो जाता है।

(5.) Keyshper In SEO Title:- इस Task के अंदर आपके आर्टिकल का Mean Keyword आपके आर्टिकल के Title के अंदर होना चाहिए। यानी आपके आर्टिकल का जो मुख्य टाइटल होता है। उसके स्टार्टिंग में आपके आर्टिकल का कीवर्ड होना अनिवार्य होता है। यह काम करने के बाद आपका यह टास्क भी पूरा हो जाता है।

(6.) Keyphrase In Sulg:- इस Task अंदर आपको एक Sulg का ऑप्शन मिल जाता है। उसके अंदर आर्टिकल के मैन कीवर्ड को डालना रहता है। यह Sulg आपके आर्टिकल की एक लिंक तैयार करता है। जिसे हम Prmalink कहते हैं। यह कार्य करने के बाद आपका यह टास्क भी कंप्लीट हो जाता है।

(7.) Keyphrase In Meta Description:- इस टास्क के अंदर आपको सामान्यतः मेटा डिस्क्रिप्शन के अंदर आर्टिकल का मेन कीवर्ड डाला रहता है। मेटा डिस्क्रिप्शन के अंदर आर्टिकल का कीवर्ड होना बहुत आवश्यक होता है। और यह आर्टिकल को रैंक करने में काफी मदद भी करता है। यह काम करने के बाद आपका यह टास्क भी पूर्ण हो जाता है।

(8.) Keyphrase In Introduction:- इस टास्क के अंदर आपको आर्टिकल के सबसे पहले पैराग्राफ के अंदर कीवर्ड को डालना होता है। Yoast SEO के मुताबिक आपको मेन हैडिंग के ऊपर एक 30-40 का छोटा सा आर्टिकल इंट्रो लिखना रहता है। और इसको डालने के बाद आपका यह टास्क भी कंप्लीट हो जाता है।

(9.) Keyphrase density:- इस टास्क के अंदर Yoast SEO आपको यह बोलता है। कि आपके आर्टिकल के अंदर कीवर्ड को कम से कम 3 बार रिपीट करना होता है। और ज्यादा से ज्यादा 5 बार. आपको आर्टिकल में 3 बार से कम और 5 बार से ज्यादा कीवर्ड को नहीं डालना चाहिए। यह करने के बाद आपका यह टास्क भी कंप्लीट हो जाता है।

(10.) Keyphrase Length:- इस Task अंदर आपको कीवर्ड की लेंथ के बारे में बताया जाता है। Yoast SEO का कहना है। कि आप अपने आर्टिकल के कीवर्ड की लेंथ मिनिमम 2 वर्ड से मैक्सिमम 4 वर्ड तक रख सकते हैं। इससे कम या ज्यादा करने पर आपका Yoast SEO कंप्लीट नहीं हो पाएगा।

(11.) Keyphrase In Subheading:- इस टास्क के अंदर आपको अपने आर्टिकल के सबहेडिंग के अंदर कीवर्ड को रखना होता है। और सबहेडिंग के अंदर की वोट डालने के बाद आपका यह टास्क भी सक्सेसफुली कंप्लीट हो जाता है।

(12.) Previously used keyphrase:- इसके अंदर आपको Yoast SEO Plugin यह बोलता है। कि आप अगर Same कीवर्ड को दूसरी बार रिपीट करते हैं। यानी दूसरे आर्टिकल के अंदर भी same Keyword है। तो आपका यह टास्क कंप्लीट नहीं किया जाएगा। क्योंकि हर आर्टिकल के अंदर आपको कुछ नया कीवर्ड डाला रहता है।

(13.) SEO Title Width:- इस टास्क के अंदर आपको अपने आर्टिकल का मेन टाइटल ज्यादा बड़ा नहीं करना होता है। इस टास्क के मुताबिक आपको अपने आर्टिकल का टाइटल viewable रखना होता है। और ऐसा करने पर आपका यह टास्क अभी कंप्लीट हो जाता है।

(14.) Text Length:- इस Task के अंदर Yoast SEO Plugin आपको यह बोलता है। कि आपके आर्टिकल की लेंथ कम से कम 300 वर्ड से ज्यादा होने चाहिए। और ज्यादा से ज्यादा आप कितनी भी रख सकते हैं। लेकिन मैं आपको कहुंगा कि आप अपने आर्टिकल की लेंथ 500 वर्ड से ज्यादा ही रखें। और अगर आप लिख सकते हैं। तो 2000 वर्ड तक भी लिख सकते हैं। क्योंकि जब आप का आर्टिकल ज्यादा बड़ा होगा तो यह गूगल में रैंग करने में काफी मदद भी करता है।

on Page SEO के लिए Yoast SEO plugin में आपको एक और फिचर मिलता है। जो आपके पोस्ट और वेबसाइट को रैंग करने में मदद करता है। उस फिचर का नाम है। Redability फिचर भी अगर आप 100% Good कर देते हैं। तो आपका आर्टिकल रैंक होने में काफी मदद करता है। यह Redability में आपStepको अपने आर्टिकल को अच्छी तरह से व्यवस्थित ढंग से सजाने के लिए कहा जाता है। और उसमें भी कुछ स्टेप्स होते हैं। जिनको आप को फॉलो करना रहता है।
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How do I setup Yoast Plugin for WordPress for SEO for my website?

Why is the Yoast plugin important in terms of SEO? 

Yoast Seo क्या है? Yoast Seo टूल Seo के लिए क्यों improtant है? और Why is the Yoast plugin important in terms of SEO? इसकी पूरी जानकारी आपको इस आर्टिकल में मिलेगी ।


यदि आप अपनी वेबसाइट के लिए Yoast Seo का उपयोग करते हो तो इससे आपको बहुत सारे फायदे भी होते है और इसी के साथ साथ आपको बहुत सारी हानिया भी होती है ।

Yoast Seo क्या है? 

Yoast Seo एक वर्डप्रेस प्लगइन है, जो ब्लोग्गेर्स के लिए बहुत उपयोगी होता है। ये प्लगइन फ्री और Paid दोनों वर्शन में उपलब्ध है यदि आपको Seo ऑप्टिमाइजेशन के लिए ज्यादा सुविधाए चाहे तो आप इस टूल के प्रीमियम यानी paid वर्शन को खरीद सकते हो। ये ब्लॉग या वेबसाइट के आर्टिकल और पेज को Seo ऑप्टिमाइज़ बनाने में बहुत मदद करता है।

Seo के लिए Yoast Seo इम्पोर्टेन्ट क्यों है?

यदि आप अपनी वेबसाइट के seo के लिए किसी भी seo टूल का उपयोग नहीं करते हो या यदि आप yoast seo टूल का उपयोग करते हो तो ये हमारे seo के लिए टूल बहुत ही इम्पोर्टेन्ट है, यदि आप Yoast Seo प्लगइन का उपयोग करते हो तो आपको ये सब लाभ मिलते है ।

ये आपके आर्टिकल को Search Engines के लिए ऑप्टिमाइज़ करने में मदद करता है, ये आपके कंटेंट की Readability दिखता है, ये आपके पोस्ट और पेज का सर्च इंजन प्रीव्यू दिखता है, ये हमें फोकस keyword ऐड करने में मदद करता है, आप ट्विटर और फेसबुक शेयर प्रीव्यू को Custmize कर सकते हो, ये आटोमेटिक Xml Sitemap बनाने में मदद करता है, ये सभी सर्च इंजन में वेबसाइट को ऐड करने में भी मदद करता है और ये वेबसाइट के Issues को ढूंढने में मदद करता है आदि सभी फायदे होते है yoast seo टूल का उपयोग करने से ।

पर हमें एक बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए की जिस चीज के जितने भी फायदे होते है उतनी ही हानिया भी होती है, यदि  आप Yoast Seo का उपयोग करते हो, तो आपको ये सब हानिया होती है ।

ये कैनोनिकल Urls को परिभाषित नहीं कर सकता है, ये आपकी वेबसाइट की स्पीड को Slow करता है, ज्यादा Seo सेटिंग पाने के लिए आपको प्रीमियम वर्शन की जरूरत पड़ती है, ये आपकी वेबसाइट की सरचना को नियंत्रित करने में असमर्थ है, और इसके उपयोग से आपकी वेबसाइट को सुरक्षा सम्बन्धित खतरा देता है । आदि ऐसे बहुत सारी हानिया भी होती है yoast seo टूल का उपयोग करने से  ।
वेसे तो yoast seo टूल हमारी वेबसाइट या ब्लॉग का seo करने के लिए बहुत ही जरुरी होता है पर ऐसे एक बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए की किसी भी टूल का उपयोग करने से पहले उसके लाभ व हानियों को पूरी तरह से देखना व पढना चाहिए  ।

आपने क्या सिखा google Pagespeed और Pingdom के बारे में   – 

हम उम्मीद करते है की Yoast Seo क्या है ? Yoast Seo टूल Seo के लिए क्यों इम्पोर्टेन्ट है ? और Why is the Yoast plugin important in terms of SEO? इसकी पूरी जानकारी आपको मिल गई होगी, यदि आपका इससे सम्बन्धित कोई भी सवाल है तो आप हमें कमेंट के माध्यम से पुछ सकते हो हमे आपके सवाल का जल्द से जल्द जवाब देने का प्रयास करेंगे ।

Yoast SEO WordPress Plugin की इस जानकारी को अपने दोस्तों व अपनी सोशल मीडिया पर जरुर से शेयर करे ताकि आपके दोस्तों को भी इसकी जानकारी मिल सके।

How do I setup Yoast Plugin for WordPress for SEO for my website?

सबसे पहले Plugin में जाके add New प्लगइन पर क्लिक करे और yoast seo टूल को Install करके active कर ले ।

yoast seo को सेटअप कैसे करे – 

yoast seo को सेटअप करने के लिए स्टेप बाई स्टेप पूरी जानकारी हिंदी में 
1. Dashboard –
Step -1. सबसे पहले Configuration Link पर क्लिक करे ।
Step -2. यदि आपकी वेबसाइट ऑनलाइन है तो Environment में A पे क्लिक करे ।
Step -3. उसके बाद आपको अपनी वेबसाइट का टाइप (प्रकार) चुनना है ।
Step -4. यदि आप किसी कंपनी के लिए वेबसाइट बना रहे हो तो कंपनी के ऑप्शन को चुने, नहीं तो Person पर क्लिक करके अपना नाम डाले और Next पर क्लिक कर देना है ।
Step -5. अब आपको Social Profiles का पेज दिखेगा, वहा अपने सोशल मीडिया links को ऐड करे और फिर Next पर क्लिक करे ।
Step -6. अब आपको सर्च इंजन Visibility दिखेगा यहाँ पर पोस्ट और पेज दोनों पे yes कर दे, और Next पर क्लिक कर दे ।
Step -7. अगर आपकी वेबसाइट पर एक से ज्यादा ऑथर्स है तो No पर क्लिक करे नहीं तो yes पर क्लिक करके Next पर क्लिक कर दे ।
Step -8. अब यहाँ पर आपको अपनी वेबसाइट को google search Console में ऐड करे और और Submit पर क्लिक करे ।
Step – 9. अब Title सेटिंग का टैब आएगा यहाँ पर अपनी वेबसाइट का टाइटल लिख दे और फिर Next पर क्लिक कर दे ।
Step -10. अब Newsletter का टैब खुलेगा इसमे यहाँ अपनी gmail id डाले और Next पर क्लिक कर दे ।
Step -11. यहाँ yoast seo का प्रीमियम वर्शन ख़रीदे का ऑप्शन आएगा यदि आप खरीदना चाहते हो तो यहाँ से खरीद सकते हो नहीं तो Next पर क्लिक कर दे ।
Step -12. अब आपका yoast seo पूरी तरह से सेटअप हो गया और अब Close पर क्लिक कर दे ।


2. Feature 

अब आपको Feature वाले टैब को ओपन करना है और उसमे ये सब सेटिंग करनी होगी ।
1. SEO Analysis – Enable
2. Readability Analysis – Enable
3. Cornerstone Content – Enable
4. Text link Counter – Enable
5. Xml Sitemap – Enable
6. Ryte Integration – Enable
7. Admin Bar Menu – Disable 
8. Security – Enable 

बस इतना करते ही आपके yoast seo की Feature की सेटिंग Complete हो जाती है ।

3. WordPress Tools – 

यहाँ पर आपको Bing, google और Yendex search इंजन के कोड को हेड में पस्त करने की जरूरत नहीं होती है आपको बस Open WordPress में Webmaster Tools पर क्लिक करना है यहाँ पर आपको ये सब ऑप्शन मिलेगा 

Bing वेरिफिकेशन कोड  
google वेरिफिकेशन कोड
Yendex वेरिफिकेशन कोड

yoast seo में Search Appearance की सेटिंग करनी होगी ।

1. General – 
स्टेप – 1. Title Separator – यहाँ पर आपको कोई भी चंगेस नहीं करनी है ।
स्टेप – 2. Company or Person – आपकी वेबसाइट कम्पनी है या Person यहाँ से सेलेक्ट कर सकते हो।
स्टेप – 3.  Company Name – यहाँ पर वेबसाइट के ऑथर का नाम लिखा जाता है ।


2. Content Type –

यहाँ आप अपनी वेबसाइट के पोस्ट, पेज और मीडिया फाइल की सेटिंग कर सकते हो की वो search इंजन में किस तरह से धिखई देगी ।

यहाँ आपको बस पोस्ट और पेज टाइटल को ही एडिट करना है बाकि किसी भी ऑप्शन को नहीं चंगे करना है नहीं तो कुछ समस्या हो सकती है ।

Media – इस टैब में आपको कुछ भी चंगेस नहीं करने है ।
Taxonomies 

यह टैब आपके के लिए बहुत ही जरुरी है यहाँ पर आपको Tags, Categories और Format का बॉक्स मिलेगा।

ये तीनो टैब आपके वेबसाइट में डुप्लीकेट कंटेंट बनाने का काम करते है जिसके कारण search इंजन में आपकी रैंकिंग डाउन हो सकती है तो बेटर यही रहेगा की आप एन सब टैब को Disable कर दे ।

Archives – इस टैब को भी disable कर दे ये भी आपकी साइट में डुप्लीकेट कंटेंट बनाने का काम करते है ।
Breadcrumbs – इस टैब में आपको किसी भी प्रकार का चंगेस नहीं करना है और यदि आप किसी भी प्रकार का चंगेस करते भी हो तो उसका seo पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
Rss – इस टैब में भी आपको किसी भी प्रकार का चंगेस नहीं करना है ।

बस इतना करते ही आपके yoast seo का सेटअप पूरा हो जाता है और साथ ही सारी seo सेटिंग्स भी सेटअप हो जाती है, इस जानकारी को अपने दोस्तों व अपनी सोशल मीडिया पर जरुर से शेयर करे ताकि आपके दोस्तों को भी इसकी जानकारी मिल सके।
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top best वर्डप्रेस seo plugins info in hindi


 वर्डप्रेस वेबसाइट को रैंक करवाने के लिए सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन द्वारा आर्टिकल को आसानी से रैंक करवाया जा सकता है कौन से सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन बेहतरीन है उनके बारे में इस आर्टिकल में बात करेंगे |


 1. Yoast SEO

 Yoast SEO वर्ल्ड पीस के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ इस सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन को माना जाता है वर्डप्रेस  SEO plugin है। वर्ल्ड प्रेस बनी वेबसाइट में ज्यादातर लोग इसी plugin का इस्तेमाल करके अपनी वेबसाइट को rank करवाते हैं यह एक पूर्ण वेबसाइट अनुकूलन उपकरण प्रदान करता है जो आपकी वेबसाइट को बेहतर बनाने में आपकी सहायता करता है।

यह वेबसाइट पर सभी पोस्ट और पेज पर आसानी से कीवर्ड जोड़ देता है और आपके पोस्ट से संबंधित सोशल मीडिया छवियों को भी रैंक करवाता है इसके अलावा किसी अन्य सोशल मीडिया साइट को भी बैंक लिंक की सहायता से जोड़ दिया जाता है yoast seo  plugin का उपयोग आप फ्री में भी कर सकते हैं और premium वर्जन लेकर और बेहतर features के साथ इसका उपयोग किया जा सकता है |

 2. SEMRush

semrush  यह बाजार का सब्जी अच्छा तथा बेहतरीन सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन उपकरण माना जाता है बिजनेस वेबसाइट में इस उपकरण का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है यह सर्च इंजन बेहतरीन तरीके से रैंक करवाने तथा व्यापार को बढ़ाने और ट्रैफिक बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सर्च इंजन माना जाता है |   

पेशेवर एसईओ विशेषज्ञों, विपणक, ब्लॉगर्स और सभी आकारों के व्यवसायों द्वारा उपयोग किया जाता है, यह आपके ट्रैफ़िक को बढ़ाने के लिए उपकरणों का एक व्यापक सेट प्रदान करता है।

इस सर्च इंजन में कीवर्ड खोजने की सुविधा भी उपलब्ध होती है जिससे आप अपने आर्टिकल या वेबसाइट को आसानी से रह करवा सकते हैं तथा प्रतिस्पर्धीओं से आगे निकल सकते हैं |
 3. Google सर्च कंसोल

यह एक गूगल द्वारा प्रोवाइड करवाया गया सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन माना जाता है जो वेबसाइट की उपस्थिति की निगरानी करने और उसे बनाए रखने के लिए गूगल द्वारा निशुल्क प्रदान किया जाता है यह टूल गूगल द्वारा फ्री में ग्राहकों को तथा ब्लॉगर को दिया जाता है जिसकी सहायता से ब्लॉगर अपनी वेबसाइट को रैंक करवा सकते हैं |

जब गूगल आपकी वेबसाइट पर प्रश्नों को क्रॉल और अनुक्रमण करने में असमर्थ होता है तो इस प्रकार के सर्च इंजन की सहायता से उन त्रुटियों को ठीक किया जा सकता है और वेबसाइट को हैंग करवाया जा सकता है
 4. AHREFS

यह काफी बेहतरीन सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन उपकरण माना जाता है लेकिन यह उपकरण एक प्रीमियम वाला उपकरण है इसी उपयोग करने के लिए आपको कुछ प्रीमियम देना होता है  यह SEMRush का एक लोकप्रिय विकल्प है और बहुत सारे समान उपकरण और सुविधाएँ प्रदान करता है। यह उपकरण हालांकि काफी बेहतरीन माना जाता है इसमें कीवर्ड सर्च करने का ऑप्शन भी उपलब्ध कराया जाता है लेकिन इसका उपयोग बिना प्रीमियम दिए नहीं कर सकते हैं |
 5.  रैंक मैथ

रैंक मैथ वर्डप्रेस के लिए काफी अनुकूल इस सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन puligne माना जाता है जो आपको सोशल मीडिया के लिए उपस्थित वेबसाइटों के अनुकूलित अनुमति प्रदान करता है  यह एक सेटअप विज़ार्ड के साथ आता है और आपको सेटअप के दौरान अन्य एसईओ प्लगइन्स से डेटा आयात करने की अनुमति देता है।

Rank math सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन उपकरण वर्ल्ड प्रेस पर सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है वर्डप्रेस पर जितनी भी website है उसमें ज्यादातर rank Math seo plugin का इस्तेमाल किया जा रहा है|
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How to do SEO without Yoast Plugin


हेल्लो फ्रेंड्स आज की पोस्ट में हम जानेंगे की wordpress में बिना seo प्लगइन के पोस्ट को कैसे ऑप्टीमाइज़्ड करते है, साथ ये भी जानेंगे की क्या बिना seo प्लगइन के पोस्ट को ऑप्टीमाइज़्ड करना सही होगा, तो चलिए शुरू करते है | 


तो दोस्तों सबसे पहले हम आपको बता दे की आप बिना प्लगइन के भी कंटेंट को यानि की पोस्ट को ऑप्टीमाइज़्ड कर सकते है, लेकिन इस सिचुएशन आपको प्लगइन के मुकाबले बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है, और शायद ये भी हो सकता है, की आपका कंटेंट सही से ऑप्टीमाइज़्ड ना हो, या फिर हद से ज्यादा ऑप्टीमाइज़्ड हो जाए कुछ भी हो सकता है | 

बिना प्लगइन SEO करने के लिए आपको उसके पूरे TERMS को सीखना पड़ेगा कि किस तरह हेडिंग का इस्तेमाल करते हैं कीवर्ड्स टैग्स इन सब के बारे में आपको एक विशेष जानकारी होना आवश्यक है इसके बिना आप SEO नहीं कर पाएंगे

आपको अपनी वेबसाइट का टाइटल और उसके META TAGS को ऑप्टिमाइज करना होगा और उसको यूजर फ्रेंडली बनाना पड़ेगा ताकि यूजर को पूरी जानकारी मिल सके

आपको अपनी वेबसाइट की स्पीड पर भी ध्यान देना चाहिए आपके अपनी वेबसाइट की जितनी ज्यादा स्पीड होगी और जितनी कम टाइम में ओपन होगी उतनी ही आपकी वेबसाइट की रैंक होने के ज्यादा चांस बनते हैं

और आपको अपनी ब्लॉग पोस्ट में कम से कम एक फोटो का इस्तेमाल करना पड़ेगा जिसके अंदर आप उसके नाम में वह उसकी टाइटल में अपना फोकस की वर्ड को ऐड करना पड़ेगा 

आप जिस भी कीवर्ड पर अपनी वेबसाइट को रैंक करवाना चाहते हैं तो उसकी कीवर्ड को आपको कम से कम 5-6 बार अपनी वेबसाइट की पोस्ट में यूज करना पड़ेगा और उसको बोल्ड करके यूज़ करना पड़ेगा

बिना प्लगइन के इस्तेमाल करने के लिए आपको छोटे-छोटे पैराग्राफ बनाकर अपनी पोस्ट को कंप्लीट लिखना पड़ता है जिसे यूजर ज्यादा समय तक आपकी वेबसाइट पर रहे 

और अगर आप बिना किसी प्लगइन के SEO करना चाहते हैं तो आपको अपनी वेबसाइट को रैंक कराने में काफी समय लग सकता है लेकिन मुश्किल भी नहीं है पर समय लगेगा आप एक दिन जरूर कर लोगे 

The on page SEO factors

जितना हो सके उतना अपने यूआरएल को शोर्ट और प्योर कीवर्ड डाले, ताकि यूआरएल अच्छे से ये डिफाइन कर सके, की आपके कंटेंट में किस तरह की जानकारी उपलब्ध है |
पोस्ट का टाइटल searchable कीवर्ड ही रखे, साथ ही उसमे फालतू के कीवर्ड भूल कर भी ऐड ना करे |
मेटा टैग्स में टार्गेटेड कीवर्ड ही प्लेस करे, ताकि यूजर ये समझ सके, की कंटेंट में क्या है |
कंटेंट के अन्दर हैडिंग को अच्छे से ऐड करे, जैसे h1, h2, h3 h4, 
Images me alt tag लगाना ना भूले |
कोसीस करे की हर पाराग्राफ शोर्ट हो, ताकि यूजर को पढने में मज़ा आये ना की बोरिंग फील हो |
वेबसाइट की लोडिंग स्पीड कम रखे ताकि यूजर को स्किप करने का मौका ना मिले, हो सके तो cache  प्लगइन साथ ही lazy लोड इमेजेज का इस्तेमाल करे | 
कंटेंट के अन्दर ज्यादा से ज्यादा 2.5% ही कीवर्ड का इस्तेमाल करे, 
कंटेंट यूजर फ्रेंडली लिखने की कोसिस करे, मीन्स यूजर के लिए ना की गूगल के लिए क्योकि आपका कंटेंट यूजर को पसंद आना चाहिए ना की गूगल को, because यूजर खुश तो गूगल खुश |

आज आपने क्या सिखा 
तो दोस्तों आज आपने ये जाना की हम बिना seo प्लगइन के भी पोस्ट को ऑप्टीमाइज़्ड कर सकते है, साथ ही उसे रैंक भी, लेकिन सही मायने में देखा जाए तो ये रास्ता कभी कभी गलत ट्रैक पर भी लेकर चला जाता है, so जब तक की आप अच्छे से ये ना जान जाए की बिना प्लगइन के seo कैसे करते है, तब तक आप ऐसी गलती ना करे | 
मुझे उम्मीद है, की आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा, और अगर आची लगी हो तो प्लीज इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे |
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Is Yoast SEO plugin is free to use in Hindi

हेल्लो फ्रेंड्स आज की पोस्ट में हम जानेगे की yoast प्लगइन क्या है, क्या ब्लॉगर इसे फ्री में यूज़ कर सकते है, या फिर इसके लिए पेमेंट करना होगा और ऐसे ही बहुत सारे सवालो का जबाब हम इस आर्टिकल के जरिये जानेगे तो चलिए शुरू करते है |

अगर आप ब्लॉगिंग की दुनिया में नए हैं और अभी भी ब्लॉगिंग की शुरुआत करी है तो आप Yoast Seo Plugin को फ्री में इस्तेमाल कर सकते हैं इसके लिए आपको कोई पैसे देने की जरूरत नहीं होगी !

जब आप फ्री वर्जन में काम करते हैं तो आपको वह सब टूल नहीं मिलते जो कि किसी एक प्रीमियम वर्जन में मिलते हैं तो आप उन सभी प्रीमियम वर्जन के फायदे लेना चाहते हो मतलब इस्तेमाल करना चाहते हो तो आपको Yoast Seo Plugin का प्रीमियम लेना चाहिए |

Yoast SEO plugin का आप बिना किसी प्रीमियम फ्री के इस्तेमाल से भी अपनी पोस्ट को गूगल के फर्स्ट पेज पर रैंक करवा सकते हैं क्योंकि वह सब कुछ तो आपको फ्री में नहीं दे सकता लेकिन आपको फ्री में बहुत कुछ देता है |

Yoast SEO Plugin की मदद से आप अपनी वेबसाइट को सभी सर्च इंजन में एक साथ जोड़ सकते हैं मतलब आप सभी वेबमास्टर टूल को एक ही पेज से आसानी से कनेक्ट कर सकते हो
जैसे गूगल वेबमास्टर टूल बिंग वेबमास्टर टूल याहू वेबमास्टर टूल और बहुत सारे सर्च इंजंस सभी में आप एक ही जगह से अपनी वेबसाइट को एक्टिवेट कर सकते हैं |

अगर आप एक फ्री yoast Seo Plugin का इस्तेमाल करते हैं तो इसमें आपको फोकस कीवर्ड सिर्फ आप एक ही डाल सकते हो लेकिन अगर आप प्रीमियम वर्जन यूज करते हैं तो आप उसमें एक से ज्यादा फोकस कीवर्ड को ऐड कर पाएंगे ।

Yoast Seo Plugin की मदद से आप देख सकते हैं कि आपका आर्टिकल कितना यूजर फ्रेंडली है और भी बहुत कुछ जानकारी हम ले सकते हैं |

इसकी मदद से आप अपनी वेबसाइट वह कंटेंट देख सकते जो पहले ऑलरेडी आ चुका है या पहले भी पब्लिश कर चुके हैं तो वह नोटिफिकेशन दे देता है ऐसा कर रखा है उस पर वापस इस्तेमाल ना करें |


इस प्लगइन की मदद से आप अपने पुराने यूआरएल को रीडायरेक्ट कर सके अपने न्यू यूआरएल पर रख सकते हैं जैसे कोई आपकी पुरानी पोस्ट रैंक करती है तो आप उसको रिकॉर्ड करके किसी और पोस्ट कर सकते हैं |

यह आपका ऑटोमेटिक इंटरनल लिंकिंग करके देता जैसे ही उस इंपॉर्टेंट कीवर्ड होते हैं उन पर यह ऑटोमेटेकली इंटरनल लिंकिंग कर देता है |

यह आपको सोशल मीडिया के प्रीव्यू दिखाता है कि आपकी पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर किस तरह देखेगी और आप चाहे तो उसको एडिट करके अपनी ओर से कुछ नयी इमेजेस वगैरह भी डाल कर उसको पोस्ट को बूस्ट कर सकते हैं |

आज आपने क्या सिखा 

तो दोस्तों आज आपने इस पोस्ट के माध्यम से ये जाना की yoast seo प्लगइन फ्री है या पेड, साथ ही इसका यूज़ हम किस तरह से करते है, और बहुत कुछ 

मुझे उम्मीद है, की आपको यह आर्टिकल बेहद पसंद आया होगा, और अगर आपके मन में कोई सवाल है, तो हमसे पूछ सकते है |
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इटली में फासीवाद का उदय का इतिहास।

इटली में फासीवाद का उदय
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में कई राजनीतिक आंदोलन हुए उनमें से एक फासिस्ट आंदोलन है इस आंदोलन का एकमात्र लक्ष्य तथा जनतंत्र को नष्ट कर तानाशाही स्थापित करना इटली और जर्मनी में फासीवाद के बड़े खतरनाक परिणाम हुए।

फासीवाद का तात्पर्य

फ़ासिज़्म शब्द इतालवी मूल का है इसका प्रयोग सर्वप्रथम बेनिटो मुसोलिनी के नेतृत्व में चलाए गए आंदोलन के लिए किया गया था फासीवाद कट्टर या उग्र राष्ट्रीयता का ही एक रूप एवं तानाशाही का परिचायक है।

फासीवाद की विशेषताएं

१.राज्य में व्यक्ति को महत्व नहीं

२. जनतंत्र विरोधी।
३. समाजवाद विरोधी
४. शांति विरोधी
५. कमजोर राज्यों के अस्तित्व में विश्वास नहीं
६. आतंक का शासन
७. उग्र विदेश नीति का समर्थक

इटली में फासीवाद के उदय का कारण

१. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद असंतुष्टि
इटली के युद्ध में सम्मिलित होने का लक्ष्य उपनिवेश प्राप्त करना था इसके शांति सम्मेलन में अपना लक्ष्य पूर्ण ना होते देख इटली वासियों में असंतुष्ट ही छा गई थी।

२. इटली की आंतरिक स्थिति
प्रथम विश्वयुद्ध का अंत हो जाने के बाद लाखों व्यक्ति बीमार हो गए 1918 के बाद इटली की आर्थिक स्थिति खराब हो गई फैक्ट्रियों के मज़दूर हड़ताल करने लगे थे।

३. सरकार की उदासीनता
सरकार ने इटली के खेतिहर और औद्योगिक मजदूरों की दुर्दशा पर कोई दिलचस्पी नहीं ली अतः फासिस्टवाद का उदय हुआ।

४. समाजवादियों की गतिविधियां
क्यों देश किसी भी हालात में सामने वादियों के जाल में फंसना नहीं चाहते थे वह एक शक्तिशाली राष्ट्रों सत्ता की स्थापना करना चाहते थे अतः फासीवाद के उदय को प्रोत्साहन मिला।

५. मुसोलिनी का व्यक्तित्व
मुसोलिनी मैं राजनीतिक चिंतन का गुण था वह एक जोशीला वक्ता तथा कुशल संगठन करता था वह 1922 में प्रधानमंत्री बन गया।

फासिस्ट पार्टी का जन्म तथा मुसोलिनी का अभ्युदय

मुसोलिनी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था 18 वर्ष की अवस्था में वह शिक्षक बना उसे अधिक शिक्षा की जरूरत महसूस हुई वह स्वीटजरलैंड चला गया उसने जिनेवा विश्वविद्यालय में शिक्षा पाई उसने मजदूर दल का संगठन किया और कारखानों में पड़ताल कराई फतेह सरकार ने उसे स्विट्जरलैंड से निकाल दिया।

इसके बाद वहां ऑस्ट्रेलिया गया वहां से भी उसे निकाल दिया गया 1915 में वह सेना में भर्ती हो गया 1017 में युद्ध भूमि से वह जख्मी होकर लौटा और अपने को सैनिक सेवा से मुक्त कर लिया भूतपूर्व सैनिकों की मदद से एक संगठन बनाया जिसे फासिस्ट कहा जाता है।

फांसी स्टोर का सिद्धांत फासीवाद का हल आया था सिस्टर पार्टी के युवक सदस्यों को काली कमीज भी कहा जाता था क्योंकि यह लोग हमेशा काली कमीज पहनते थे।

पाकिस्तानी प्राचीन रोमन साम्राज्य के प्रतीकों को स्वीकार कर लिया था सिस्टर पार्टी एक अनुशासित पार्टी थी जो धीरे-धीरे लोकप्रिय हो गई और लोग इनके कार्यों से प्रभावित होने लगे इसका उद्देश्य था साम्यवादी आंदोलन को कुचलना।

इटली की सरकार उस समय बहुत ही कमजोर थी और देश में चारों और अराजकता फैल गई थी सन 1921 में चुनाव हुए किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला मुसोलिनी के अनुयायियों ने आतंक खाया फिर भी फांसी स्टोर को मात्र 35 स्थान मिले।

कम्युनिस्ट और समाजवादियों को 138 स्थान मिले फिर भी मुसोलिनी हतोत्साहित नहीं हुआ उन्होंने नेपल्स नगर में सभा का आयोजन किया जिसमें हजारों स्वयंसेवक एवं दल के अन्य सदस्य थे 28 अक्टूबर सन 1922 को रूम गिरने के लिए एक अभियान का आयोजन किया।

इटली का राजा विक्टर मैन्युअल आतंकित हो उठा सन 1922 में 29 अक्टूबर को राजा ने मुसोलिनी को सरकार में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया मुसोलिनी ने आमंत्रण सहर्ष स्वीकार कर लिया और कहा कल इटली में मंत्रिमंडल नहीं रहेगा बल्कि सरकार रहेगी बिना एक भी गोली चलाए मुसोलिनी के नेतृत्व में फांसिस्ट इटली में सत्तारूढ़ हो गई।

फासिस्ट पार्टी के विजय के कारण

वहां का शासक एवं जनता दोनों लोकतंत्र और समाजवाद को देश के लिए खतरा समझते थे उन्हें यह विश्वास था कि फासीवाद ही समाजवादी आंदोलन का दमन कर सकते हैं इसलिए उन्हें इटली का शासन सौंप दिया गया।

मुसोलिनी के कार्य फासीवादी की विजय के परिणाम

१. अधिनायकवाद की स्थापना

मुसोलिनी ने इटली में आतंक का राज्य कायम किया अपने दल को छोड़कर सभी दलों पर प्रतिबंध लगा दिया उसने समाजवादी आंदोलन को कुचल दिया जल थल और वायुसेना पर भी अपना अधिकार कर लिया था सिस्टर अखबारों को छोड़कर अन्य सभी अखबारों को बंद कर दिया गया।

२. आर्थिक सुधार

मुसोलिनी ने युद्ध का ऋण चुका दिया औद्योगीकरण और कृषि में उन्नति की रेडियो मोटा और हवाई जहाजों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया।

३. शिक्षा संबंधी सुधार

विद्यालयों में फांसी से संबंधित शिक्षा अनिवार्य कर दी गई सैनिक प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया यह मंत्र दिया जाता था कि विश्वास करो आज्ञा मानो और युद्ध करो।

४. यहूदियों का विरोध

इटली में यहूदियों के लिए कोई स्थान नहीं था परिणाम स्वरूप आने की हो दीया ने इटली को छोड़ दिया

५. विजय अभियान

सन 1924 में मुसोलिनी ने युगो स्लोवाकिया के साथ संधि की उसने अल्बानिया पर अधिकार कर लिया सन 1935 में इटोपिया और अल्बानिया पर आक्रमण किया एवं उस पर अधिकार कर दिया।

६. स्पेन का युद्ध

सन 1936 में स्पेन में गृहयुद्ध चूड़ा विद्रोहियों का नेता जनरल फ्रैंको था जनरल सैनिकों ने मुसोलिनी की मदद से स्पेन की सत्ता हथिया ली।

७. विभिन्न देशों से संधियां

इटली और जर्मनी के बीच 1936 में एक संधि हुई जो रोम बर्लिन दूरी के नाम से जानी जाती है जर्मनी ने जापान के साथ एंटी को मिंटन पैक किया मुसोलिनी उसमें शामिल हो गया इस प्रकार रोम बर्लिन टोक्यो धुरी राष्ट्र का पैक बन गया जो द्वितीय विश्व युद्ध में मिलकर लड़े।