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संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की भूमिका l India’s role in the United Nations

1. संघ की स्थापना और चार्टर निर्माण में

सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में भाग लेकर भारत उनका मन संस्थापक देशों में से एक सदस्य बना मानव अधिकार और मौलिक स्वतंत्र गांव को भारतीय प्रतिनिधियों की सिफारिश पर चार्टर में जोड़ा गया।

2. संघ की सदस्य संख्या बढ़ाने में

संघ में अपने विरोधी गुट को प्रवेश देने में कई देश रुकावट डालते थे परंतु भारत ने अपने आक्रमणकारी चीन के परिवेश का समर्थन कर संघ की सदस्य संख्या बढ़ाने में प्रेरक कार्य किया।

3. संघ के विभिन्न अंगों का संचालन में

सन 1954 में भारत की सिम की विजय लक्ष्मी पंडित संयुक्त राष्ट्र महासभा के आठवीं अधिवेशन के अध्यक्ष निर्वाचित हुई

डॉ राधाकृष्णन और मौलाना अब्दुल कलाम आजाद यूनेस्को के प्रधान निर्वाचित हुए राजकुमारी अमृत कौर विश्व स्वास्थ्य संगठन डॉ बी आर सी एन विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन बाबू जगजीवन राम अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन डॉ एच जे भाभा अणुशक्ति आयोग के अध्यक्ष डॉ चिंतामणि देशमुख अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अध्यक्ष डॉ नागेंद्र सिंह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश जाकर संघ के संचालन में सहयोग कर चुके हैं।

4.संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति व सुरक्षा संबंधी कार्य

1. कोरिया समस्या

उत्तर और दक्षिण कोरिया के युद्ध में विश्वयुद्ध की
संभावनाएं बढ़ रही थी संयुक्त राष्ट्र ने वहां शांति स्थापित करने 16 राष्ट्रों की सेना भेजी उस में भारतीय सैनिक भी शामिल थे जिन्होंने युद्ध बंदियों की अदला बदली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2. हंगरी समस्या

1956 में प्रतिक्रियावादी तत्वों ने हंगरी में विद्रोह कर दिया हंगरी सरकार के अनुरोध पर रूस ने सेना भेजकर विद्रोह को दबा दिया संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत के हंगरी में शांति स्थापना के प्रयासों का समर्थन किया।

3. स्वेज नहर समस्या

26 जुलाई 1956 को मिश्र ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया स्वेज नहर पर अपना अधिकार भी स्थापित करने के लिए इंग्लैंड फ्रांस और इजरायल ने मिस्र पर आक्रमण कर दिया भारत ने इन आक्रमणकारी देशों की निंदा कर युद्ध बंद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

4. कांगो समस्या

कांगो के स्वतंत्र होने पर बेल्जियम ने उस पर हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया संयुक्त राष्ट्र संघ के आदेश से भारत ने अपनी सेना की बड़ी टुकड़ी भेजकर कांगो में युद्ध के खतरे को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

5. निशस्त्रीकरण हेतु किए गए प्रयास

भारत ने सहयोगी देशों की मदद से सन 1961 में महासभा में आणविक परीक्षणों को बंद करने का प्रस्ताव रखा 1963 में ब्रिटेन अमेरिका और सोवियत रूस के आणविक परीक्षण प्रतिबंध संधि का भारत ने स्वागत किया सन् 1986 में राजीव गांधी ने महासभा में निशस्त्रीकरण की पुल की और सन 1988 से 22 जून तक एक चरणबद्ध कार्यक्रम चलाकर तहत पूर्ण का सुझाव दिया।

6. रंगभेद के विरुद्ध संघर्ष

अफ्रीका और रोड एशिया की गोरी सरकारों द्वारा श्वेतांबर किए जाने वाले अत्याचारों का भारत में प्रबल विरोध किया साथ ही संयुक्त राष्ट्र संघ पर भी भारत ने इस हेतु लगातार दबाव बनाए रखा अल्लाह 22 दिसंबर 1993 में अफ्रीका नेताओं को भी बराबरी का अधिकार मिल गया।

7. उपनिवेशवाद समाप्ति हेतु किए गए प्रयास

भारत में उपनिवेशवाद की समाप्ति और वहां की जनता की स्वतंत्रता के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ में जो प्रस्ताव रखा उसे स्वीकार कर लिया गया बांग्लादेश और नामीबिया को मुक्त कराने भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

8. मानव अधिकारों की रक्षा

भारत मानव अधिकारों का सदैव समर्थक रहा 21 दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकार आयोग का गठन किया भारत ने उच्चायोग के सुझावों को मान्यता दी यह संयुक्त राष्ट्र महासचिव और महासभा के अधीन काम करते हुए नागरिक सामाजिक सांस्कृतिक और अन्य सभी प्रकार के मानव अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने के लिए उत्तरदाई है।

9. आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को हल करने में

भारत में संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से आर्थिक दृष्टि से पिछड़े देशों पर विशेष बल दिया विकसित देशों से अविकसित देशों के लिए अधिकाधिक आर्थिक सहायता देने का अपील की 24 अक्टूबर 1985 में राजीव गांधी ने महासभा के सदस्य देशों से अपील की कि विश्व के शांति के प्रति स्वयं को समर्पित करते हुए विश्व भुखमरी को दूर करने के लिए संघर्ष करें।

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