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भारत में उपनिवेशवाद सन् 1756 से सन 1900

हमने पढ़ाई की इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने सन 1757 में बंगाल के नवाब को प्लासी की लड़ाई में हराकर भारतीय उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश साम्राज्य की शुरुआत की थी इसके बाद किस तरह धीरे-धीरे पूरा भारत उनके अधीन हो गया इस पाठ में हम यहां समझने की कोशिश करेंगे कि किस प्रकार औपनिवेशिक शासन ने भारत के समाज को प्रभावित किया।

सन 1757 के बाद भारत का उपनिवेश ई करण कई चरणों से गुजरा प्रत्येक चरण का स्वरूप ब्रिटेन की बदलती जरूरत तथा भारतीयों के प्रतिरोध कौन से निर्धारित हुआ एक और उपनिवेश नीतियों के कारण भारत एक संपन्न देश से गरीब  बन गया।

दूसरी और भारत के लोग अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए एक आधुनिक राष्ट्र का निर्माण कर पाए और उसे लोकतंत्र और समानता की ओर ले जा पाए हमने भारतीय राष्ट्रवाद लोकतंत्र और समानता के लिए संघर्ष की कहानी पड़ी यहां हम अपनी विशेष नीतियों और उनके प्रभावों के बारे में नीचे पड़ेंगे।

एकाधिकार व्यापार का दौर

शुरुआती दौर में ब्रिटिश उपनिवेशवाद के भारत में दो लक्ष्य थे पहला लक्ष्य था भारत के साथ व्यापार में एक अधिकारी स्थापित करना ईस्ट इंडिया कंपनी यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि वह विदेशी में भारत माल को भेजें ताकि कम से कम दाम में भारतीय किसानों व कारीगरों का सामान खरीद कर अधिक से अधिक दाम में दुनिया भर में बेच सकें।

ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय व्यापार पर हस्तशिल्प के उत्पादन का अधिक एकाधिकार स्थापित करने के लिए राजनीतिक शक्ति का प्रयोग किया पहले से व्यापार में लगे भारतीय व्यापारियों को या तो व्यापार से ही हटा दिया गया या फिर ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए व्यापार करने को विवश किया गया इन भारतीय शिल्पीओं एवं बुनकरों को अपना माल कम कीमत पर ब्रिटिश कंपनी को बेचने के लिए विवश किया गया।

इन सबके कारण भारत का विदेशों से व्यापार तो काफी बढ़ गया लेकिन बुनकर एवं शिल्पी यों को उचित कीमत कीमत नहीं मिली।

दूसरी और लक्ष्य था भारत से प्राप्त राजस्व नियंत्रण कर उसे ब्रिटेन के हित में उपयोग करना ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में तथा संपूर्ण एशिया व अफ्रीका में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए युद्ध करना पड़ता था इसके लिए अत्यधिक धन की आवश्यकता थी इसे भारत से प्राप्त राजस्व श्रीजी निकालने की कोशिश हुई।

ज्यादा नागेश्वर के लिए ज्यादा भूभाग पर नियंत्रण जरूरी था इसके लिए भारत के विभिन्न भागों को जीतकर ब्रिटिश भारत में मिलाने की कोशिश हुई।

जो इलाके कंपनी के अधीन हुए वहां पर कंपनी ने नई प्रकार की भू राजस्व व्यवस्था लागू की जिसके तहत जमींदार जमीन के मालिक बने और जमीन पर निजी स्वामित्व स्थापित हुआ।

अंग्रेजों की उम्मीद थी कि इससे उन्हें अधिकतम भू राजस्व मिलेगा किस नीति का दूरगामी असर यहां पड़ा कि किसानों की स्थिति लगातार बिगड़ती गई और वे अभूतपूर्व मानव निर्मित आकलन के शिकार होने लगे वह बढ़ते हुए राजस्व को अदा करने के लिए ऋण लेकर साहूकार के चंगुल में फंसते गए।

दूसरा दा और इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति और भारत का उपनिवेशी करण

सन 1750 से सन 1800 में ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति शुरू हो गई थी लेखाधिकारी व्यवस्था उद्योग पतियों के हित के अनुकूल नहीं थी वे नहीं चाहते थे कि भारतीय कपड़े यूरोप में बिके उल्टा वे चाहते थे कि भारत उनके कारखानों में निर्मित कपड़े खरीदे।

उन्होंने दबाव डाला कि भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी का नियंत्रण समाप्त हो धीरे-धीरे ब्रिटेन की संसद ने भारतीय मामलों पर दखल बढ़ाया और ईस्ट इंडिया कंपनी के एकाधिकार को सन 1813 में समाप्त कर दिया सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद संसद ने भारत का प्रशासन सीधे अपने हाथों में ले लिया।

भारत की व्यापारिक नीतियों में बहुत सारे बदलाव किए गए ब्रिटेन से आने वाले सामानों का आयात शुल्क को या तो कम कर दिया गया या फिर समाप्त कर दिया गया ताकि भारत में अंग्रेजी का खानों में बना सामान बिक सके ।

लाखों जुलाहे जो कल तक कपड़ा बनाने के काम में लगे हुए थे ग्रज कार हो गए कोई काम-धंधा नहीं मिलने पर वे भी खेती करने लगे इससे कृषि का आबादी का दबाव बढ़ने लगा उतनी ही जमीन पर अधिक लोग निर्भर हो गए इस पूरी प्रक्रिया को भारत का निरूद्योगी करण कहा जाता है इससे हिंदुस्तान गरीब देशों की श्रेणी में आ गया।

भारत के गरीब होने के पीछे एक और कारण था विभिन्न तरीकों से अंग्रेजों द्वारा भारत से इंग्लैंड भेजा जाना भारतीय राजाओं के खजाने की लूट अंग्रेजी सैनिकों व अफसरों के वेतन आदि के रूप में भारतीय धन इंग्लैंड भेजा गया यह भुगतान भारत के किसानों के द्वारा चुकाए गए करोड़ से होता था।

औद्योगिकरण के लिए नील कपास पटसन जैसे कच्चे माल और अनाज चाय और शक्कर जैसी कृषि उपज की अधिक जरूरत थी इन्हीं सस्ते में खरीदकर वे ब्रिटेन भेजना चाहते थे औपनिवेशिक सरकार ने किसानों पर दबाव डाला कि वे इन्हें व्यापारिक फसलों के रूप में उगाए और बेचे क्योंकि किसानों को लगान चुकाना था वे विवश थे व्यापारिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अनेक सिंचाई परियोजनाओं को अंजाम दिया जिससे खेती के लिए पर्याप्त पानी मिल सके।

साथ साथ उसने देश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों को बंदरगाहों से जोड़ने के लिए रेल लाइनें बिछाई भारत में रेलवे के विकास के लिए अधिकांश सामान से खरीदा गया।

इस कारण वहां के लोहा उद्योग को काफी फायदा हुआ इस प्रकार भारतीय कृषि को ब्रिटेन उद्योगों की जरूरत के अनुसार ढाला गया नकदी फसल का उत्पादन बढ़ा और कपड़ों की जगह उनका निर्यात होने लगा।

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