Categories
Uncategorized

Shubhash Chandra Bose Full Biography In Hindi

नमस्कार दोस्तो में हु रमेश ओर आज हम जानेंगे सुभाषचंद्र बोस के जीवन पर सूरज का तेज बढ़ा दे ऐसा कोई सम्मान नहीं वह सब कुछ देकर चले गए पर रत्ती भर अभिमान नहीं क्या करेगा जमाना उस नेता के कामों को जो अंग्रेजों को सुना गया आजाद हिंद के तराना जी हां दोस्तों आज हम लोग बात करने जा रहे हैं

Shubhash Chandra Bose Full Biography In Hindi

भारत के उस फ्रीडम फाइटर के बारे में जिसने देश को सब कुछ दिया लेकिन बदले में कुछ भी नहीं लिया यहां तक कि 23 जनवरी को विशेष के एग्जाम में मिली 40 रन की बदौलत कोई अच्छी सी सरकारी नौकरी करके आराम वाली जिंदगी जी सकते थे लेकिन जिस इंसान के आदर्श भगवद गीता अध्याय जिसके दिल में स्वामी विवेकानंद और उनका वासुदेव कुटुंबकम वाला ज्ञान बढ़ता हो वह इंसान अपने देश और अपने देश के लोगों के हो रही दुर्दशा के ऊपर आंख बंद करके एक आराम वाली जिंदगी कैसे जी सकता था 

Shubhash Chandra Bose Full Biography In Hindi

इसीलिए वाला बाग कांड हुआ तो उसने सुभाष चंद्र बोस को ना सुभाष चंद्र बोस नेताजी सुभाष चंद्र बोस शुरू किया मकसद से ऐसी जाने की इंडियन सिविल सर्विसेस वाले अपने सुनहरे भविष्य को पीछे छोड़कर ब्रिटेन से भारत लौटे तो उससे पहले अपने भाई को पत्र लिखते हुए उनसे यह कहा अगर हम लोगों को हमारे देश के लोगों में देश के लिए सम्मान प्यार और आग पैदा करनी है

तो उसके लिए कुर्बानियों बलिदान देश में रहकर देना पड़ेगा जो कि सचमुच सुभाष चंद्र बोस ने दिया क्योंकि साल में भारी क्वालिटी सबसे बड़ी और टेक्निकली 12 पोलिटिकल पार्टी यानी कि कांग्रेस के अध्यक्ष बन चुके थे और यहां अगर वह चाहते तो लोगों की हां में हां मिलाकर खुद को महान बताने वाले रास्ते पर चलते हुए अपनी औलाद वालों के लिए भी जन्म जन्म तक ठोकर खाने की व्यवस्था कर सकते थे जैसे कि कुछ लोगों ने कीजो सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बने उस वक्त भारत के अंदर महात्मा गांधी के बाद अगर कोई इंसान से इंसान के ऊपर भरोसा करते थे

Full Biography In Hindi

लेकिन इसके बावजूद इस तरीके के गोल्डन किधर है आजादी मिलने का इंतजार करने के बजाय सुभाष चंद्र बोस ने पूरे स्वाभिमान के साथ अंग्रेजों से आजादी छीनने का फैसला लिया और अगर हम लोग पूरी इमानदारी से बात करें तो सुभाष चंद्र बोस का स्वाभिमानी था जिसकी वजह से हुआ महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच में ना सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने के लिए मजबूत करती है महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस कोई भाई इस बात को लेकर में गांधीजी के ऊपर कमेंट नहीं करना चाहता लेकिन क्यों कि गांधी जी ने सुभाष चंद्र बोस को कांग्रेस छोड़ने के लिए बोला इस वजह से फुल पब्लिक सपोर्ट होने के बावजूद सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस के अध्यक्ष की कुर्सी को नासिक लात मार के अंग्रेजों के फायदे निपटाने के मकसद से भारत के आर्मी बनाने की बात करते हुए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने का फैसला शुरू होती है

भारत को आजादी दिलाने की लड़ाई कमेंट करना वैसे भी रोशनी देता है इस तरीके के सर्टिफिकेट चलाती है सूरज को नहीं वैसे मैं आप लोगों को यह बात बता आजाद हिंद फौज की स्थापना सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फ़ौज की कमान सुभाष चंद्र बोस हाथों में आए कि तकरीबन 1 साल पहले यानी कि साल 1942 में हो चुकी थी कि साल 1942 में जापान के राजा के साथ पूरा परेशान करते हुए भारत के नेशनल लीडर्स ने मोहन सिंह जी की कमान में नासिक आजाद हिंद फौज की स्थापना की बल्कि उस वक्त आर्मी अंग्रेजो के खिलाफ शुरू कर चुके थे 3 साल 1943 में उस वक्त सब कुछ बदल गया जब आज़ाद हिंद फ़ौज की कमान सुभाष चंद्र बोस के हाथों में आए इसके बारे में अभी आगे चल कर बात करेंगे अभी हम लोग कहानी को लेकर चलते हैं उस जगह जहां सुभाष चंद्र बोस ने महात्मा गांधी के साथ चल रहे हैं

जिसकी वजह से कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद को छोड़ा वैसे यहां आप लोगों को यह बात भी पता होना चाहिए उस वक्त महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस सुभाष चंद्र बोस ने महात्मा गांधी को निश्चित है आज़ाद हिंद फौज का निर्माण तू ने महात्मा गांधी को योर फादर ऑफ नेशन का टाइटल दिया जो कुछ भी हो लेकिन क्योंकि हम सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस पार्टी छोड़ चुके थे इस वजह से कांग्रेस छोड़ने के बाद अब सुभाष चंद्र बोस अपने उस आईडी को एक्सीडेंट करने के लिए तरीके से स्वतंत्र है जिसके तहत वह उस दुनिया की नजर फुल कंट्री जर्मनी और जापान से भारत की 1 साल गवर्नमेंट को तो वह देश की है लेकिन देश की आज की तारीख बाहर से रन करती है सुभाष चन्द्र बोस और हिटलर की मुलाकात कि भारत की एक्सएल गवर्नमेंट को इन तमाम कंट्री से मान्यता दिलवा ते हुए भारत की खुद की इंडिपेंडेंट आर्मी बनाते हुए भारत में मौजूद ब्रिटिश गवर्नमेंट और उसके आर्मी के ऊपर बाहर से आकर सीधा हमला करना ताकि भारत को आजाद कराया जा सके लेकिन इस प्लान में सुभाष चंद्र बोस के सामने सबसे बड़ी समस्या थी खूब सुभाष चंद्र बोस जी की लोकेशन से मिलना पड़ेगा ना और वह कभी हो सकता था जब सुभाष चंद्र बोस भारत छोड़कर इन देशों में जाएं लेकिन क्योंकि उस वक्त ब्रिटेकोर को भी इस बात का शक था कि हो सकता है सुभाष चंद्र बोस अब किसी भी तरीके का कोई बड़ा कदम उठाएं इस वजह से उस वक्त ब्रिटिश गवर्नमेंट घंटे सुभाष चंद्र बोस जी के घर के आस-पास का लगा रखा था दिल के रास्ते जर्मनी पहुंचे यहां मैं आप लोगों को यह बात बता दूं कि मदद के लिए जर्मनी और हिटलर कभी भी सुभाष चंद्र बोस जी की पहली पसंद नहीं थे क्योंकि एक्चुली मदद मांगने के लिए जाने के लिए निकले थे लेकिन अगर आप लोगों को याद हो तो यह पूरा घटनाक्रम हुआ था उसे यह भी पता था कि आज नहीं तो कल हिटलर नशे के ऊपर हमला करेगा इससे उस वक्त S10 ब्रिटेन के साथ में भी किसी भी तरीके का पंगा नहीं चाहता था क्योंकि अगर हिटलर रसिया के ऊपर हमला करता है

जनम कहानी हिंदी में 

तो फिर सेकंड हैंड पर तो ब्रिटेन फ्रांस और अमेरिका के लिए इस वक्त मदद करना तो दूर की बात रसिया ने सुभाष चंद्र बोस को उनके ओरिजिनल नाम के बलबूते रसिया से होते हुए जर्मनी जाने के लिए ट्रांजिट वीजा देने से मना कर दिया और इसी वजह से उस वक्त सुभाष चंद्र बोस को इटली की मदद से इटली के पास और इटली के ही किसी नागरिक के नाम पर आया आज़ाद हिंद फौज का भारत पर कब्ज़ा करने के लिए हमला रसिया होते हुए मदद के लिए हिटलर के पास जर्मनी जाना पड़ा पर कब्जा कर रखा था अमेरिका फ्रांस और तमाम वेस्टर्न कंट्रीज जंपिंग के साथ ऐसे ही लड़ रही थी ऐसे में उस वक्त वह तो भारत की मदद नहीं करती मदद तो उनका दुश्मनी करता है

जो कि उस वक्त जर्मनी था इस वजह से उस वक्त सुभाष चंद्र बोस का जर्मनी जाना बिल्कुल सही था जर्मनी पहुंच चुके थे इस वजह से अब समय आ चुका था क्यों बोलना सीख ले से मिले बल्कि भारत को आजाद कराने के लिए उससे मदद भी मांगी जो कि उन्होंने मांगी थी लेकिन उन्हें नहीं मिली सुभाष चंद्र बोस जर्मनी के एक साल बाद एक की मदद करने से मना कर दिया कि वह इंडिया जर्मनी से बहुत दूर है सुमन आदमी वहां जाएगी इसे जरूरी था कि कोई ना कोई मैनेज करें यह बात उसने खूब नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भारत की मदद करने से मना करते वक्त उनके मुंह पर बोला लेकिन भारत को लेकर अपने विचारों को खिलाने जो अपनी आत्मकथा में लिखा उसमें उसने यह कहा कि भारत के ऊपर ब्रिटेन के लोगों का कब्जा था उससे खुश था उसके हिसाब से

तमाम लोगों को बुलाना चाहिए जो कर रहा था सुभाष चंद्र बोस बहुत ज्यादा इंप्रेस था इस वजह से सुभाष चंद्र बोस को मदद के नाम पर सिर्फ और सिर्फ जर्मनी से जापान जाने के लिए जर्मनी की सबमरीन में जगह दी जिसकी मदद से सुभाष चंद्र बोस बॉस ने इस बात की घोषणा भी की कि वह भारत के स्टैंड प्रवेश के ऊपर हमला करके सबसे पहले उसे बेटी स्कूल से आजाद कराने की कोशिश करेंगे जिसके लिए उन्हें आर्मी की जरूरत थी जो कि उनके पास थी आजाद हिंद फौज के रूप में जैसे बनाया गया था इससे तकरीबन 1 साल पहले यानी कि सलमान के साथ शंकर के सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फ़ौज की कमान इंडियन आर्मी के तमाम भारतीय सैनिकों को भी सुभाष चंद्र बोस को सौंप दिया जिसे उसने युद्ध के दौरान कंचन किया था इतना ही नहीं इस दौरान सुभाष चंद्र बोस ने भारत की आजादी बनाएं के साथ-साथ खुद की करेंसी बैंक हॉस्पिटल रोड स्थित है

मतलब के सुभाष चंद्र बोस हर चीज सोच समझकर पूरी जवाबदारी के साथ प्लान कर चुके थे वाकिंग जैसे भारत आजाद हो तो उस वक्त हमारे पास पूरा का पूरा सिस्टम पहले से रहने दो फिर जो कुछ भी हो लेकिन क्योंकि अब सुभाष चंद्र बोस के बाद आजाद हिंद फौज के रूप में अपनी खुद की आर्मी थी बल्कि उस आर्मी में भारत के तमाम लोग थे जो भारत की आजादी और सुभाष चंद्र बोस के लिए जान दे भी सकते थे और जान ले भी सकते थे और इसी वजह से अब वक्त आ चुका था पूरी तैयारी के साथ भारत को आजाद कराने के मकसद से हमला करें इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गया जब भारत की अपनी खुद की पहली इंडिपेंडेंट आर्मी सुभाष चंद्र बोस की कमान में भारत को आजाद कराने के मकसद से बर्मा से होते हुए नासिक भारत के अंदर घुसी बल्कि अपनी मेहनत और आजादी के जज्बे के बलबूते पर सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज ने इंफाल और कोहिमा जैसे इलाकों को ब्रिटेन से आजाद कराते हुए अपने कब्जे में ले लिया वैसे आप को यह बात पता होना चाहिए के अकॉर्डिंग को शाहनवाज खान जो कि आजाद हिंद फौज के मोस्ट प्रॉमिनेंट आजाद हिंद फौज भारत में घुसने से पहले उन्होंने इस देश की धरती को चुमा था आशा करते है आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा धयनवाद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *